सीबीएसई विसंगति पर केजरीवाल का बड़ा सवाल- शिक्षा मंत्री को क्यों नहीं हटाया...
सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को पद से हटा दिया है। इस कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार को घेरते हुए इसे छात्रों और अभिभावकों के साथ अन्याय बताया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 3 जून 2026
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। केंद्र सरकार द्वारा बोर्ड के चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल अधिकारियों का तबादला कर देना इस पूरे मामले का समाधान नहीं है और इससे छात्रों तथा अभिभावकों की चिंताओं का जवाब नहीं मिलता।इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। लाखों छात्र और अभिभावक इस मामले पर सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। वहीं विपक्ष लगातार इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
क्या है पूरा मामला
बारहवीं कक्षा की परीक्षा में लागू की गई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। आरोप लगाए गए कि मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इस विवाद के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच असंतोष बढ़ गया।मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से हटा दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया, ताकि विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अरविंद केजरीवाल ने साधा निशाना
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं के बीच केवल अधिकारियों का तबादला कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने छात्रों और उनके परिवारों की भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों का भविष्य इस प्रक्रिया से प्रभावित हुआ है, उन्हें केवल प्रशासनिक बदलाव से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने पूरे मामले में व्यापक जवाबदेही तय करने की मांग की।
शिक्षा मंत्री को लेकर भी उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस विवाद के बावजूद शिक्षा मंत्रालय के शीर्ष स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जनता के गुस्से को नजरअंदाज कर रही है और केवल सीमित प्रशासनिक कदम उठाकर मामले को शांत करने का प्रयास कर रही है।उनका कहना है कि यदि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में वास्तव में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं तो इसकी जिम्मेदारी केवल कुछ अधिकारियों तक सीमित नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग दोहराई।
नए अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
केंद्र सरकार ने विवाद के बीच वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों लोखंडे प्रशांत सीताराम और वरुण भारद्वाज को क्रमशः बोर्ड का नया चेयरमैन और सचिव नियुक्त किया है। सरकार का मानना है कि नए नेतृत्व के माध्यम से बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और विश्वास बहाल किया जा सकेगा।नई नियुक्तियों के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। छात्रों और अभिभावकों को उम्मीद है कि नए अधिकारी विवाद से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान निकालने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगे।
न्यायालय तक पहुंचा मामला
बारहवीं कक्षा की परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ा यह विवाद अब न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। कुछ याचिकाओं में छात्रों को राहत देने और संबंधित पोर्टल को अधिक समय तक खुला रखने की मांग की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रह गया है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय की कार्यवाही और जांच समिति की रिपोर्ट दोनों इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आने वाले दिनों में इस विवाद से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी चिंता
इस पूरे विवाद का सबसे अधिक असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ा है। परीक्षा परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कई अभिभावकों ने भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और स्पष्ट जानकारी देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।