चंडीगढ़ में घरों में खुल सकेंगे होमस्टे

चंडीगढ़ प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होमस्टे नीति को मंजूरी दे दी है। अब निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले रिहायशी मकानों में ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ यानी होमस्टे संचालित किए जा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे पर्यटकों को बेहतर और किफायती आवास मिलेगा, वहीं मकान मालिकों के लिए आय का नया स्रोत भी तैयार होगा।

चंडीगढ़ में घरों में खुल सकेंगे होमस्टे

दि राइजिंग न्यूज़ | चंडीगढ़ | 29 जून 2026

चंडीगढ़ प्रशासन ने दी होमस्टे नीति को मंजूरी

चंडीगढ़ प्रशासन ने शहर में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई होमस्टे नीति को मंजूरी दे दी है। प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की स्वीकृति के बाद संपदा विभाग ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।इस फैसले के बाद अब निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत रिहायशी मकानों में ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ यानी होमस्टे संचालित किए जा सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर आने वाले पर्यटकों को साफ-सुथरी और किफायती ठहरने की सुविधा मिलेगी।


किन मकानों में खुल सकेगा होमस्टे

नई नीति के अनुसार हर रिहायशी मकान में होमस्टे खोलने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए मकान का आकार कम से कम 500 वर्ग गज होना अनिवार्य है।इसके अलावा केवल संपत्ति का वास्तविक मालिक ही होमस्टे संचालित कर सकेगा। किसी किरायेदार या अन्य व्यक्ति को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा।मकान मालिक को पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराना होगा और प्रशासन के संबंधित विभागों से सभी आवश्यक अनुमतियां एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने होंगे।


2008 की नीति से लिया गया सबक

चंडीगढ़ प्रशासन ने वर्ष 2008 में भी इसी तरह की योजना शुरू की थी। हालांकि बाद में कई मकानों को मिनी होटल में बदलने और नियमों के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आने लगी थीं।इन परिस्थितियों को देखते हुए उस समय की योजना को वापस लेना पड़ा था। इस बार प्रशासन ने पिछली कमियों को ध्यान में रखते हुए नियमों को काफी सख्त बनाया है ताकि होमस्टे केवल सीमित और नियंत्रित रूप में ही संचालित हो सकें।


घर का स्वरूप नहीं बदला जा सकेगा

नई नीति के तहत होमस्टे संचालकों को अपने घर के बाहर किसी प्रकार का फ्रंट ऑफिस, रिसेप्शन या व्यावसायिक काउंटर बनाने की अनुमति नहीं होगी।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मकान का रिहायशी स्वरूप पूरी तरह बरकरार रखा जाएगा और उसे किसी होटल या गेस्ट हाउस जैसा रूप नहीं दिया जा सकेगा।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिहायशी इलाकों का मूल चरित्र प्रभावित न हो।


व्यावसायिक गतिविधियों पर रहेगी रोक

नीति में कई प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।होमस्टे संचालक अपने परिसर से क्लाउड किचन, ट्रैवल एजेंसी, टूर पैकेज सेवा या बाहरी लोगों के लिए भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियां नहीं चला सकेंगे।प्रशासन का कहना है कि होमस्टे का उपयोग केवल आवास सुविधा तक ही सीमित रहेगा।


पड़ोसियों की सुविधा का भी रखा गया ध्यान

नई नीति में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि होमस्टे की वजह से आसपास रहने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।यदि किसी होमस्टे से शोर-शराबा, यातायात की समस्या या अन्य असुविधाएं उत्पन्न होती हैं तो प्रशासन संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई कर सकता है।पड़ोसियों की शिकायतों को नीति के तहत गंभीरता से लिया जाएगा।


नियम तोड़ने पर होगा भारी जुर्माना

प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान भी किया है।यदि कोई संचालक गलत जानकारी देता है, निर्धारित शर्तों का उल्लंघन करता है या होमस्टे का उपयोग अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करता है तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।इसके अलावा 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।


बिजली-पानी और टैक्स में मिलेगी राहत

होमस्टे संचालकों के लिए एक बड़ी राहत यह है कि इन प्रतिष्ठानों को व्यावसायिक श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।इसका मतलब है कि बिजली और पानी के बिल घरेलू दरों पर ही वसूले जाएंगे। साथ ही संपत्ति कर भी आवासीय दरों के अनुसार ही लिया जाएगा।इस व्यवस्था से मकान मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और वे आसानी से होमस्टे संचालित कर सकेंगे।


पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

 नई होमस्टे नीति से चंडीगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों को होटल के मुकाबले अपेक्षाकृत सस्ती और घरेलू माहौल वाली आवास सुविधा उपलब्ध होगी।साथ ही स्थानीय लोगों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी पैदा होंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि यह नीति शहर के पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।