युवाओं पर गर्व है, फर्जी डिग्री वालों को कहा था परजीवी’ — मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विवादित बयान पर दी सफाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने विवादित “परजीवी” और “कॉकरोच” वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनका निशाना देश के युवा नहीं बल्कि फर्जी डिग्रियों के सहारे सम्मानित पेशों में घुसने वाले लोग थे। उन्होंने युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि देश की नई पीढ़ी विकसित भारत की नींव है।

युवाओं पर गर्व है, फर्जी डिग्री वालों को कहा था परजीवी’ — मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विवादित बयान पर दी सफाई

दि राइजिंग न्यूज डेस्क |  16 मई 2026

विवादित टिप्पणी पर मुख्य न्यायाधीश का बड़ा बयान, कहा- भारत के युवाओं पर है गर्व

‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच’ संबंधी बयान को लेकर देशभर में मचे विवाद के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और इसे युवाओं के खिलाफ प्रचारित किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि उनका निशाना देश के मेहनती और ईमानदार युवा नहीं, बल्कि वे लोग थे जो फर्जी डिग्रियों और नकली प्रमाणपत्रों के सहारे सम्मानित पेशों में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा हैं। उनके अनुसार, कुछ भ्रष्ट और स्वार्थी तत्व मेहनती युवाओं का अधिकार छीनने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कारण योग्य युवाओं को अवसरों से वंचित होना पड़ता है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।

वरिष्ठ वकील विवाद के दौरान आया था बयान

दरअसल, यह पूरा मामला सर्वोच्च न्यायालय में हुई एक सुनवाई के दौरान सामने आया था। एक याचिकाकर्ता ने अदालत में खुद को ‘वरिष्ठ वकील’ का दर्जा न दिए जाने को लेकर शिकायत की थी। इस पर मुख्य न्यायाधीश नाराज हो गए और उन्होंने कहा कि ‘वरिष्ठ वकील’ की उपाधि कोई सजावटी सम्मान नहीं है, जिसे मांगकर प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक न्याय व्यवस्था के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ कार्य किया हो। उनके अनुसार, नकली दस्तावेजों के आधार पर व्यवस्था में घुसपैठ करने वाले लोग न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर कर रहे हैं। इससे असली प्रतिभाओं और योग्य युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर मचा था बड़ा विवाद

मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी को लेकर देशभर में विवाद शुरू हो गया था। उन्होंने कहा था कि समाज में कुछ लोग ऐसे हैं जो अवसर न मिलने पर मीडिया, सामाजिक माध्यमों और तथाकथित सामाजिक गतिविधियों के जरिए दूसरों पर हमला करना शुरू कर देते हैं। इस बयान को कई लोगों ने बेरोजगार युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का अपमान बताया। इसके बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।विवाद बढ़ने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी पूरे युवा वर्ग को लेकर कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल उन लोगों को लेकर था जो गलत तरीकों से व्यवस्था में घुसकर मेहनती युवाओं के अधिकारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चे पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक युवा लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।

युवाओं को बताया विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसमें युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने कहा कि आज का युवा विज्ञान, शिक्षा, तकनीक, खेल और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। ऐसे में युवाओं को बदनाम करने या उनका अपमान करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने दोहराया कि उनका बयान केवल उन लोगों के खिलाफ था जो फर्जी डिग्रियों के सहारे व्यवस्था को कमजोर करने का काम कर रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बाद देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर कई लोगों ने मुख्य न्यायाधीश की सफाई का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर कुछ संगठनों का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने साफ कर दिया है कि भारत की युवा शक्ति ही देश का भविष्य है और वही विकसित भारत की मजबूत नींव साबित होगी।