कांग्रेस नेता से 10 लाख की ठगी राहुल गांधी के सेक्रेटरी बनकर रची साजिश

हरियाणा में कांग्रेस के एक नेता से राहुल गांधी का पर्सनल सेक्रेटरी बनकर 10 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने फर्जी फंडरेजिंग और पार्टी कार्यक्रम का झांसा देकर पैसे ऐंठे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और डिजिटल सबूतों की पड़ताल की जा रही है।

कांग्रेस नेता से 10 लाख की ठगी राहुल गांधी के सेक्रेटरी बनकर रची साजिश

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 30 जून 2026

हरियाणा में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से राहुल गांधी का पर्सनल सेक्रेटरी बनकर 10 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि फर्जी पहचान और पार्टी कार्यक्रम का झांसा देकर यह पूरा फ्रॉड अंजाम दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुई ठगी

एफआईआर के अनुसार, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के एग्जीक्यूटिव मेंबर संजीव को 24 जनवरी को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को राहुल गांधी का पर्सनल सेक्रेटरी कनिष्क सिंह बताया और चंडीगढ़ में एक राजनीतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का हवाला दिया।

फर्जी कार्यक्रम और फंडरेजिंग का झांसा

आरोपी ने दावा किया कि चंडीगढ़ में उत्तराखंड कांग्रेस यूनिट का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होना है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसी बहाने आर्थिक सहयोग की जरूरत बताकर फंडरेजिंग की मांग की गई।कॉलर ने होटल बुकिंग और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर पैसे की मांग की और भरोसा दिलाया कि कार्यक्रम में पार्टी हाईकमान से मुलाकात भी कराई जाएगी।

10 लाख रुपये कैसे दिए गए

आरोप है कि संजीव और उनके सहयोगी पवन शर्मा ने मिलकर 10 लाख रुपये जुटाए। निर्देशों के अनुसार दोनों चंडीगढ़ के एक होटल पहुंचे, जहां पार्किंग में उनकी मुलाकात एक व्यक्ति दीपक से कराई गई।फोन पर पुष्टि करने के बाद दोनों ने दीपक को 10 लाख रुपये सौंप दिए। हालांकि, संजीव ने एहतियात के तौर पर पैसे सौंपते समय आरोपी की तस्वीर भी खींच ली थी।

अतिरिक्त पैसे मांगने पर खुला शक

अगले दिन आरोपी ने फिर से 5 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। जब संजीव ने पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया। इसके बाद शक गहराया और पार्टी स्तर पर जानकारी लेने पर पता चला कि चंडीगढ़ में ऐसा कोई कार्यक्रम तय ही नहीं था।

शिकायत में देरी और वजह

पीड़ित नेता ने पुलिस को बताया कि शुरुआत में शर्मिंदगी के कारण उन्होंने शिकायत नहीं की। बाद में इसी तरह के अन्य मामलों की जानकारी मिलने पर उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस अधीक्षक चंदर मोहन के अनुसार, थानेसर सिटी थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है।

साइबर ठगी का बढ़ता मामला

यह मामला एक बार फिर राजनीतिक नाम और पहचान का इस्तेमाल कर की जा रही साइबर ठगी की गंभीरता को उजागर करता है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की दिशा में कार्रवाई तेज की जाएगी।