वैश्विक संकट के बीच दौड़ी भारतीय अर्थव्यवस्था
दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती का परिचय दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की 7.1 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है। ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है।
दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 05 जून 2026
वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत रही अर्थव्यवस्था
पिछले कई महीनों से वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर भी चिंता जताई जा रही थी। हालांकि अब जारी हुए प्रारंभिक सरकारी आंकड़ों ने इन आशंकाओं को काफी हद तक गलत साबित कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.7 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मानी जा रही है।
अंतिम तिमाही में भी बनी रही तेजी
आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। यह दर्शाता है कि वित्त वर्ष के अंतिम तीन महीनों में भी आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम तिमाही में मजबूत प्रदर्शन ने पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि दर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उद्योग, सेवा क्षेत्र और उपभोग गतिविधियों में लगातार सुधार देखने को मिला।
सकल घरेलू उत्पाद में बड़ा इजाफा
स्थिर कीमतों के आधार पर देश का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे एक वर्ष पहले यह आंकड़ा 299.89 लाख करोड़ रुपये था। nयह वृद्धि दर्शाती है कि देश में उत्पादन, निवेश और आर्थिक गतिविधियों में निरंतर विस्तार हुआ है। आर्थिक विशेषज्ञ इसे भारत की मजबूत आंतरिक मांग और सुधारों का परिणाम मान रहे हैं।
नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद भी बढ़ा
महंगाई के प्रभाव को शामिल करने वाले नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 346.36 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 318.07 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
किन आधारों पर तैयार किए गए आंकड़े
सरकार के अनुसार यह अनुमान विभिन्न आर्थिक संकेतकों के विस्तृत विश्लेषण के बाद तैयार किए गए हैं। इनमें औद्योगिक उत्पादन, वस्तु एवं सेवा कर संग्रह, कंपनियों के वित्तीय परिणाम, वाहन बिक्री, माल परिवहन, दूरसंचार सेवाओं का उपयोग, बैंकिंग गतिविधियां, कर संग्रह और व्यापार से जुड़े अनेक आंकड़े शामिल हैं। इन सभी संकेतकों ने मिलकर यह संकेत दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं।
मंत्रालय ने दी महत्वपूर्ण जानकारी
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बताया कि नए अनुमान तैयार करते समय वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के ताजा आंकड़ों के साथ-साथ पहले जारी आंकड़ों में हुए संशोधनों को भी शामिल किया गया है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का उपयोग किया जाएगा, जिसका आधार वर्ष 2022-23 होगा।
कृषि, उद्योग और सेवाओं से मिला सहारा
कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक वृद्धि को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। देश में उपभोग मांग मजबूत बनी रही, सरकारी खर्च जारी रहा और निजी निवेश में भी सुधार देखने को मिला। यही कारण रहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित नहीं हुई।
आगे की तस्वीर कैसी
यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां अत्यधिक खराब नहीं होती हैं तो आने वाले महीनों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत प्रदर्शन कर सकती है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता होगी क्योंकि इनका सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
31 अगस्त को आएंगे अगले आंकड़े
सरकार ने बताया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही अर्थात अप्रैल से जून 2026 के सकल घरेलू उत्पाद संबंधी आंकड़े 31 अगस्त 2026 को जारी किए जाएंगे। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि नए वित्त वर्ष की शुरुआत में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार किस दिशा में आगे बढ़ रही है।वैश्विक अनिश्चितताओं और युद्ध जैसे हालातों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। 7.7 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि दर यह संकेत देती है कि देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है। यदि यही गति आगे भी जारी रहती है तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकता है।