मॉनसून की रफ्तार थमी देश में सूखे जैसे हालात की आशंका

भारत में दक्षिण पश्चिम मॉनसून की गति अचानक कमजोर पड़ने से मौसम वैज्ञानिक चिंतित हैं. सैटेलाइट तस्वीरों में बड़े हिस्सों से बादल गायब दिख रहे हैं और बारिश का स्तर सामान्य से काफी नीचे चला गया है. इससे खरीफ फसलों और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. विशेषज्ञ इसे अस्थायी ठहराव बता रहे हैं.

मॉनसून की रफ्तार थमी देश में सूखे जैसे हालात की आशंका

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 जून 2026


मॉनसून की रफ्तार थमी देश में सूखे जैसे हालात की आशंका

जून का महीना आधा बीत जाने के बावजूद देश में दक्षिण पश्चिम मॉनसून की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है. मौसम विभाग और सैटेलाइट से प्राप्त ताजा आंकड़ों में यह संकेत मिला है कि देश के बड़े हिस्सों में मॉनसूनी बादलों की मौजूदगी बेहद कमजोर हो गई है. सामान्य तौर पर इस समय आसमान में घने बादलों की परत दिखाई देती है लेकिन इस बार मध्य भारत, दक्षिण भारत और पूर्वी क्षेत्रों के बड़े हिस्सों में आसमान अपेक्षाकृत साफ और शुष्क नजर आ रहा है.


64 फीसदी बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता

मौसम विभाग के अनुसार चार जून से पंद्रह जून के बीच देश में औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है. इस अवधि में जहां सामान्य वर्षा लगभग तिरेपन दशमलव सात मिलीमीटर होनी चाहिए थी वहीं वास्तविक वर्षा उन्नीस दशमलव दो मिलीमीटर के आसपास दर्ज की गई. यह स्थिति लगभग चौसठ प्रतिशत की भारी कमी को दर्शाती है. रेनफॉल डिपार्चर मैप में कई राज्यों में लाल और पीले संकेत दिखाई दे रहे हैं जो सामान्य से कम वर्षा की ओर इशारा करते हैं.


सैटेलाइट तस्वीरों में गायब हुए मॉनसूनी बादल

सैटेलाइट चित्रों में यह बात और स्पष्ट होती है कि भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर वह पारंपरिक सफेद बादलों की घनी परत गायब है जो आमतौर पर मॉनसून के सक्रिय रहने पर दिखाई देती है. इस बार केवल कुछ क्षेत्रों में ही बादलों की हल्की उपस्थिति दर्ज की जा रही है जबकि अधिकांश क्षेत्र साफ दिखाई दे रहे हैं.


ऊपरी वायुमंडल की हवाओं का असामान्य व्यवहार

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति समुद्री नमी की कमी के कारण नहीं है बल्कि ऊपरी वायुमंडल में चल रही हवाओं के असामान्य व्यवहार का परिणाम है. ऊपरी स्तर पर बहने वाली पश्चिमी दिशा की तेज हवाएं अपने सामान्य मार्ग से दक्षिण की ओर खिसक गई हैं. इस बदलाव ने पूर्वी दिशा से आने वाली मॉनसूनी हवाओं की ताकत को कमजोर कर दिया है जिससे बादलों के बनने और टिकने की प्रक्रिया बाधित हो रही है.


बादल बनने की प्रक्रिया पर पड़ा असर

सामान्य परिस्थितियों में पूर्वी हवाएं भारत के ऊपर गर्म और नम हवा को ऊपर उठाती हैं जिससे घने बादल बनते हैं और देशभर में वर्षा होती है. लेकिन इस बार पश्चिमी हवाओं का दबाव इतना अधिक है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो रही है. परिणामस्वरूप अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में नमी मौजूद होने के बावजूद वह भूमि तक प्रभावी बारिश नहीं कर पा रही है.


मॉनसून ठहराव की स्थिति या अस्थायी ब्रेक

मौसम वैज्ञानिक इस स्थिति को मॉनसून का पूरी तरह समाप्त होना नहीं मान रहे हैं बल्कि इसे एक अस्थायी ठहराव बता रहे हैं. उनका मानना है कि यह स्थिति कुछ दिनों तक बनी रह सकती है लेकिन इसके बाद हवाओं का पैटर्न बदलने की संभावना है.


आने वाले दिनों में बारिश लौटने की उम्मीद

पूर्वानुमान के अनुसार सप्ताह के अंत तक वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव आने की उम्मीद है. जैसे ही ऊपरी स्तर की पश्चिमी हवाओं का प्रभाव कम होगा वैसे ही मॉनसून की गतिविधियां फिर से तेज हो सकती हैं. इससे मध्य और दक्षिण भारत में एक बार फिर व्यापक बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.


किसानों और जल संसाधनों पर असर की आशंका

फिलहाल किसानों और आम लोगों के लिए यह समय चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई और जल भंडारण पर सीधा असर पड़ सकता है. मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अगले अपडेट का इंतजार किया जा रहा है.