गोहत्या पर बैन की मांग, सुप्रीम कोर्ट बोला- बकरीद से एक दिन पहले याद आया...
बकरीद से पहले गोहत्या पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि त्योहार से ठीक पहले ऐसे मुद्दे उठाना उचित नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 27 मई 2026
बकरीद से ठीक पहले देशभर में गोहत्या पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की और कहा कि क्या यह मामला केवल प्रचार पाने के लिए त्योहार से एक दिन पहले अदालत में लाया गया है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को आखिरी समय में उठाना उचित नहीं माना जा सकता।
अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व पदाधिकारी ने दायर की याचिका
यह जनहित याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल की ओर से दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि देशभर में गोवंश वध निषेध कानूनों को पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाए। साथ ही राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे बूचड़खानों के संचालन और नियंत्रण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी कहा कि गाय और उसके बछड़ों को वध से बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।
बकरीद का हवाला देकर तत्काल सुनवाई की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि दो दिन बाद बकरीद का त्योहार है और ऐसे में मामले की तुरंत सुनवाई बेहद जरूरी है। वकील ने दलील दी कि यदि अदालत चाहे तो अगले ही दिन इस मामले को सूचीबद्ध कर अंतरिम आदेश जारी कर सकती है। उनका कहना था कि देश में पहले से मौजूद कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है ताकि गोहत्या को रोका जा सके। वकील ने अदालत से अपील की कि मामले को संवेदनशील मानते हुए जल्द सुनवाई की जाए।
मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की मंशा पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या यह मामला केवल प्रचार पाने के लिए ईद से एक दिन पहले अदालत में लाया गया है। अदालत ने कहा कि यदि यह इतना महत्वपूर्ण विषय था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि त्योहार से ठीक पहले इस तरह की याचिकाएं दाखिल करना अदालत को उचित नहीं लगता। अदालत की इस टिप्पणी ने सुनवाई के दौरान माहौल को गंभीर बना दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में किसी भी तरह की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अब इसमें कोई आपात स्थिति नजर नहीं आती। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद मामले को आगे बढ़ाने से मना कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने संकेत दिया कि संवेदनशील धार्मिक मौकों पर इस तरह की याचिकाएं दाखिल करने से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है। अदालत ने बिना कोई अंतरिम आदेश दिए सुनवाई टाल दी।
गोहत्या कानूनों को लेकर फिर गरमाई बहस
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद देशभर में गोहत्या कानूनों को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। कई संगठनों का कहना है कि देश में पहले से बने कानूनों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का मानना है कि धार्मिक त्योहारों से ठीक पहले इस तरह के मुद्दे उठाना सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है। राजनीतिक दलों के बीच भी इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
बकरीद से पहले संवेदनशील मुद्दों पर बढ़ी सियासी हलचल
बकरीद जैसे बड़े धार्मिक त्योहार से पहले इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। कुछ संगठनों ने अदालत में याचिका दायर किए जाने का समर्थन किया है, जबकि कई लोगों ने इसे माहौल खराब करने की कोशिश बताया है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में संतुलन और कानूनी प्रक्रिया दोनों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।