यूपी में पशुपालकों और किसानों के लिए एडवाइजरी जारी
उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने बढ़ती गर्मी और कम बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। किसानों को धान के बजाय मक्का, उड़द, मूंग और तिल जैसी फसलों को प्राथमिकता देने, फसलों में नमी बनाए रखने तथा पशुपालकों को पशुओं के टीकाकरण और सुरक्षित चारा प्रबंधन की सलाह दी गई है।
दि राइजिंग न्यूज़। लखनऊ। 06 जून 2026
गर्मी और कम बारिश को देखते हुए कृषि अनुसंधान परिषद ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (यूपीकार) ने प्रदेश में बढ़ती गर्मी, संभावित लू और सामान्य से कम वर्षा के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों और पशुपालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। परिषद के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में आयोजित क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की वर्ष 2026-27 की तीसरी बैठक में आगामी दो सप्ताह के लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए गए। मौसम विभाग के अनुसार केरल में मानसून प्रवेश कर चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश में 18 जून तक सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। विशेष रूप से प्रदेश के उत्तर-पूर्वी मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान जताया गया है। ऐसे में किसानों को फसल प्रबंधन और पशुपालन में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
धान के बजाय इन फसलों को दें प्राथमिकता
यूपीकार के अनुसार वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को धान की जगह कम पानी वाली फसलों की खेती को प्राथमिकता देनी चाहिए। परिषद ने किसानों को श्री अन्न (मिलेट्स), मक्का, उड़द, मूंग और तिल जैसी फसलों की बुवाई करने की सलाह दी है। यदि मानसून में देरी होती है या बारिश सामान्य से कम रहती है तो ये फसलें किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। इससे पानी की बचत के साथ उत्पादन पर भी कम प्रभाव पड़ेगा।
लू से बचाव के लिए फसलों में बनाए रखें नमी
प्रदेश के कई जिलों में आने वाले दिनों में उष्ण लहर यानी लू चलने की आशंका जताई गई है। ऐसे में किसानों को खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। धान की नर्सरी में जलभराव न होने देने और सिंचाई केवल शाम के समय करने का सुझाव दिया गया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शाम के समय सिंचाई करने से पानी का वाष्पीकरण कम होता है और फसल को अधिक लाभ मिलता है।
खेतों की गहरी जुताई करने की सलाह
खाली पड़े खेतों में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करने की सलाह दी गई है। इससे खरपतवार, कीट और रोगों के वाहक नष्ट होंगे तथा मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। मानसून पूर्व गहरी जुताई भविष्य की फसलों के लिए लाभदायक साबित होती है।
आम और लीची के बागों के लिए विशेष निर्देश
बागवानी किसानों के लिए भी परिषद ने कई महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। आम और लीची के बागों में पर्याप्त नमी बनाए रखने को कहा गया है। आम को सुरक्षित और आकर्षक तरीके से पकाने के लिए इथरेल के उपयोग की वैज्ञानिक विधि साझा की गई है, जिससे 4 से 6 दिनों में फल समान रूप से पक सकते हैं। इसके अलावा आम की फसल को फल मक्खी से बचाने के लिए मिथाइल यूजिनाल युक्त क्यूल्योर ट्रैप लगाने और नीम आधारित जैविक घोल के छिड़काव की सलाह दी गई है।
मत्स्य पालकों के लिए भी जारी हुई चेतावनी
गर्मी के मौसम को देखते हुए मत्स्य पालकों को तालाबों में कम से कम 1.50 मीटर जल स्तर बनाए रखने की सलाह दी गई है। पानी का स्तर कम होने पर मछलियों में ऑक्सीजन की कमी और रोगों का खतरा बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
यूपीकार ने पशुपालकों के लिए भी विशेष एडवाइजरी जारी की है। राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में एचएस (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) टीकाकरण निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे अपने पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं ताकि बरसात के मौसम में रोगों के खतरे को कम किया जा सके।
ज्वार और सूडान घास के चारे को लेकर चेतावनी
ज्वार और सूडान घास के चारे में पर्याप्त नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है।यदि चारे में नमी की कमी हो जाती है तो उसमें एचसीएन (हाइड्रोजन साइनाइड) की मात्रा बढ़ सकती है, जो पशुओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए पशुपालकों को चारे की गुणवत्ता और नमी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
किसानों और पशुपालकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 और 18001805141 जारी किए गए हैं। किसी भी कृषि, पशुपालन या मौसम संबंधी समस्या की स्थिति में किसान इन नंबरों पर संपर्क कर विशेषज्ञों से सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
35 करोड़ पौधरोपण अभियान को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश सरकार के 35 करोड़ पौधरोपण लक्ष्य को पूरा करने के लिए वन विभाग की पौधशालाओं से किसानों और आम नागरिकों को निःशुल्क पौधे भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।