केरल के वायनाड में फिर भूस्खलन से मची तबाही

केरल के वायनाड में निर्माणाधीन सुरंग परियोजना के दौरान भूस्खलन होने से बड़ा हादसा हुआ। कई श्रमिक मलबे में दब गए, जबकि राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। इस घटना ने एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षा मानकों और आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केरल के वायनाड में फिर भूस्खलन से मची तबाही

दि राइजिंग न्यूज़ | केरल | 7 जुलाई 2026

केरल के वायनाड जिले में एक बार फिर भूस्खलन की घटना ने लोगों को दहला दिया है। मेप्पाडी क्षेत्र के कल्लाडी के समीप निर्माणाधीन सुरंग परियोजना में अचानक भारी मात्रा में मिट्टी और चट्टानों का मलबा ढह गया। घटना के समय निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके कारण कई श्रमिक मलबे की चपेट में आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन विभाग, राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा राहत दल और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया तथा युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

आसपास की संरचनाओं को भी पहुंचा नुकसान

भूस्खलन का प्रभाव केवल सुरंग निर्माण स्थल तक सीमित नहीं रहा। मलबे की चपेट में आसपास स्थित एक मकान, बस प्रतीक्षालय तथा कुछ अन्य संरचनाएं भी आ गईं। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज आवाज के साथ पहाड़ी का बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कई परिवारों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।

लगातार बारिश बनी बड़ी वजह

पिछले कई दिनों से वायनाड और आसपास के क्षेत्रों में लगातार भारी वर्षा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ियों की मिट्टी पानी से संतृप्त हो जाती है, जिससे ढलानों की पकड़ कमजोर पड़ जाती है। ऐसी स्थिति में हल्का अतिरिक्त दबाव भी बड़े पैमाने पर भूस्खलन का कारण बन सकता है।

निर्माणाधीन परियोजना पर उठे सवाल

घटना के बाद निर्माणाधीन सुरंग परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि निर्माण स्थल पर सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि लगातार वर्षा के दौरान निर्माण कार्य जारी रखने के निर्णय में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई।

2024 की भीषण त्रासदी की याद फिर हुई ताजा

वर्ष 2024 में भी वायनाड ने राज्य के इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना किया था। लगातार हुई मूसलाधार वर्षा के बाद जिले के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। उस त्रासदी में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी, हजारों लोग बेघर हो गए थे और अनेक गांव पूरी तरह तबाह हो गए थे। राहत एवं पुनर्वास कार्य कई महीनों तक चलता रहा था।

बार-बार भूस्खलन की चपेट में क्यों आता है वायनाड

वायनाड पश्चिमी घाट के अत्यंत संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है। यहां की भौगोलिक संरचना, तीखी ढलानें, अत्यधिक वर्षा और कमजोर चट्टानी परतें इसे भूस्खलन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती हैं। वर्षा के दौरान मिट्टी में अत्यधिक नमी आने से उसकी पकड़ कमजोर हो जाती है और बड़े हिस्से अचानक नीचे खिसक सकते हैं।

राहत एवं बचाव अभियान जारी

प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। बचाव दल लगातार मलबा हटाने में जुटे हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

आगे की चुनौती

यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, वैज्ञानिक निर्माण, समय पर निगरानी और मौसम संबंधी चेतावनियों का प्रभावी पालन कितना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजना और सख्त सुरक्षा उपाय भविष्य में ऐसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।