राम मंदिर चढ़ावा कांड: 27 दिनों में क्या-क्या हुआ

अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद को सामने आए २७ दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान नकदी बरामदगी, विशेष जांच दल का गठन, कई गिरफ्तारियां, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की क्रमवार कहानी।

राम मंदिर चढ़ावा कांड: 27 दिनों में क्या-क्या हुआ

दि राइजिंग न्यूज़ | अयोध्या |  01 जुलाई 2026

अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा विवाद पिछले २७ दिनों से उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति और धार्मिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है। इस प्रकरण ने कानून, प्रशासन, राजनीति और धार्मिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। मामले में जहां एक ओर पुलिस और विशेष जांच दल लगातार जांच में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका पर लगातार सवाल उठा रहा है। इस बीच सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


५ जून: नकदी से भरा बैग मिलने के दावे से मचा हड़कंप

मामले में पहली बड़ी हलचल तब सामने आई जब पुलिस जांच के दौरान एक आरोपी के घर पहुंची। सूत्रों के अनुसार वहां से नकदी से भरा एक काला बैग बरामद किया गया। हालांकि इस बरामदगी को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन इसी घटना के बाद चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की चर्चा तेजी से फैल गई।बताया गया कि बरामद नकदी और उससे जुड़े दस्तावेजों को जांच का अहम हिस्सा बनाया गया। पुलिस ने इस घटना के बाद कई लोगों से पूछताछ शुरू की और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगालने शुरू कर दिए। यहीं से पूरे मामले ने गंभीर रूप लेना शुरू कर दिया।


७ जून: विपक्ष ने उठाया मुद्दा, ट्रस्ट ने आरोपों से किया इनकार

कुछ दिनों बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मुद्दा उठाया। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई और विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगना शुरू कर दिया।दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। उनका कहना था कि ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है और चढ़ावे में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती चली गई।


११ जून: आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हुआ

मामला जैसे-जैसे सुर्खियों में आता गया, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ने लगे। विपक्षी दलों ने सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया।इस दौरान विभिन्न राजनीतिक नेताओं के बयान लगातार सामने आते रहे। मामला केवल जांच तक सीमित नहीं रहा बल्कि प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।


१३ जून: विशेष जांच दल का गठन

लगातार बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।विशेष जांच दल को वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंक लेन-देन और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ सहित सभी पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। सरकार ने दावा किया कि जांच पूरी तरह तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।


१५ जून: जांच दल ने संभाली जांच की कमान

विशेष जांच दल अयोध्या पहुंचा और उसने मौके पर जाकर जांच शुरू की। अधिकारियों ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं, चढ़ावा संग्रह प्रणाली और वित्तीय अभिलेखों की जांच की। कई कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ की गई।जांच एजेंसियों ने डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों की भी पड़ताल शुरू की ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका हो सकती है।


२३ जून: सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट

लगातार कई दिनों तक जांच करने के बाद विशेष जांच दल ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर आगे विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई।हालांकि रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इसके बाद पुलिस की कार्रवाई और तेज हो गई। जांच एजेंसियों ने कई नए लोगों से पूछताछ शुरू की और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।


२५ जून: प्राथमिकी दर्ज, आठ आरोपी गिरफ्तार

मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब ट्रस्ट की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस का कहना था कि गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। साथ ही वित्तीय दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।


२६ जून: न्यायिक अभिरक्षा और इस्तीफों की घोषणा

गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें चौदह दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। इसी दिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।हालांकि इस्तीफे की घोषणा के साथ ही इस पर भी चर्चा शुरू हो गई कि क्या ट्रस्ट इन इस्तीफों को स्वीकार करेगा। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया।


२७ जून: ट्रस्ट ने इस्तीफों की पुष्टि की

अगले दिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। हालांकि उनकी स्वीकृति को लेकर अंतिम निर्णय लंबित बताया गया।इस्तीफों की पुष्टि के बाद विपक्ष ने इसे अपनी मांगों का असर बताया, जबकि ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि यह निर्णय व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया है और जांच प्रक्रिया से इसका कोई संबंध नहीं है।


२८ जून: आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी

जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार आरोपियों के घरों और अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए गए।

पुलिस का कहना था कि बरामद सामग्री की जांच की जा रही है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने मामले में और लोगों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया।


२९ जून: दोबारा पेशी और प्रशासनिक कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपियों को दोबारा न्यायालय में पेश किया गया, जहां उन्हें चौदह दिन की न्यायिक अभिरक्षा में ही रखने का आदेश दिया गया। इसी दिन जांच अधिकारियों ने चंपत राय का बयान भी दर्ज किया।साथ ही निगरानी से जुड़े एक अधिकारी का तबादला किए जाने की भी जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच नई बहस शुरू हो गई।


३० जून: बैंक खातों की जांच में जुटी एजेंसियां

विशेष जांच दल ने जेल में बंद मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से विस्तृत पूछताछ की। इस दौरान बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और नकदी के स्रोत को लेकर कई अहम जानकारियां मिलने की बात सामने आई।जांच एजेंसियां अब पूरे धन प्रवाह का पता लगाने में जुटी हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित गड़बड़ी कैसे हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।


१ जुलाई: जांच के लिए अतिरिक्त समय की चर्चा

सूत्रों के अनुसार विशेष जांच दल ने जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त पंद्रह दिन का समय मांगा है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर की नजर बनी हुई है।


अब तक की प्रमुख कार्रवाई

अब तक इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सात आरोपियों के पास से नकदी बरामद की गई है। कुल लगभग उन्यासी लाख चौरासी हजार रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई है। ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है, हालांकि उनकी स्वीकृति को लेकर अंतिम निर्णय अभी शेष है। विशेष जांच दल लगातार साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ करने में जुटा हुआ है।


राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।धार्मिक संतों और कथावाचकों ने भी इस प्रकरण पर चिंता जताते हुए कहा है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया चढ़ावा पूरी पारदर्शिता के साथ धर्म, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा जैसे कार्यों में उपयोग होना चाहिए। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।