कुर्बानी छोड़ परिवार ने दिया संदेश, बकरे की जगह काटा स्पेशल केक
आगरा के एक मुस्लिम परिवार ने बकरीद पर बकरे की कुर्बानी की जगह बकरे की तस्वीर वाला केक काटकर इंसानियत और जीव हत्या रोकने का संदेश दिया। परिवार की यह अनोखी पहल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे भाईचारे व मानवता का संदेश बता रहे हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ |आगरा | 28 मई 2026
बकरीद पर मुस्लिम परिवार ने बदली परंपरा
उत्तर प्रदेश के आगरा में बकरीद से पहले एक मुस्लिम परिवार की अनोखी पहल ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जहां एक तरफ लोग बकरों की कुर्बानी की तैयारी में जुटे हैं, वहीं आगरा के एक परिवार ने बकरे की कुर्बानी की जगह बकरे की तस्वीर वाला केक काटकर इंसानियत और जीव हत्या रोकने का संदेश दिया है। इस पहल के बाद परिवार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह मामला आगरा के शाहगंज इलाके का है, जहां एडवोकेट गुल चमन शेरवानी और उनके परिवार ने घर में एक खास कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान पूरे परिवार ने मिलकर बकरे की आकृति वाले केक को काटा और लोगों से प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश फैलाने की अपील की।
परिवार ने दिया बड़ा संदेश
परिवार का कहना है कि असली कुर्बानी जानवर की नहीं बल्कि इंसान के अंदर मौजूद लालच, नफरत, अहंकार और बुराइयों की होनी चाहिए। एडवोकेट गुल चमन शेरवानी ने कहा कि अल्लाह को दिखावा नहीं बल्कि इंसान की सच्ची नीयत पसंद होती है। उन्होंने कहा कि त्योहारों का मकसद इंसानियत और भाईचारे को बढ़ावा देना होना चाहिए। परिवार की इस पहल को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंचने लगे। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने इस कदम की सराहना की और इसे समाज को जोड़ने वाला संदेश बताया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई पहल
जैसे ही इस अनोखी बकरीद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आईं, लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ लोग इसे इंसानियत का संदेश बता रहे हैं तो कुछ इसे बकरीद मनाने का नया तरीका कह रहे हैं। हालांकि इस तरह की पहल पहले भी देश के कुछ हिस्सों में देखने को मिल चुकी है, जहां लोगों ने बकरे की जगह प्रतीकात्मक केक काटकर त्योहार मनाने की कोशिश की थी।
आगरा के इस परिवार की पहल ने बकरीद को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ परंपरा और धार्मिक मान्यताओं की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर इंसानियत, पर्यावरण और जीवों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल इस घटना ने यह दिखा दिया कि बदलते दौर में त्योहार मनाने के तरीके भी बदल रहे हैं। हालांकि आने वाले दिनों में इस पहल को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।