स्ट्रोक के बाद दोबारा खतरे को 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है नई दवा, रिसर्च में बड़ा दावा
नई मेडिकल रिसर्च में दावा किया गया है कि स्ट्रोक के बाद दी जाने वाली एक नई कॉम्बिनेशन दवा से दोबारा स्ट्रोक का खतरा लगभग 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह दवा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है और कई मरीजों पर किए गए परीक्षण में बेहतर परिणाम सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज स्ट्रोक उपचार में बड़ा बदलाव ला सकती है, हालांकि इसके लंबे समय के प्रभाव पर अभी और अध्ययन जारी है।
दि राइजिंग न्यूज | 12 मई 2026
स्ट्रोक के बाद दोबारा खतरे का कारण क्या है
स्ट्रोक से उबरने के बाद भी मरीजों में दोबारा स्ट्रोक का खतरा लंबे समय तक बना रहता है। इसका सबसे बड़ा कारण लगातार अनियंत्रित उच्च रक्तचाप माना जाता है। जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता तो मस्तिष्क की रक्त वाहिकाएं कमजोर होने लगती हैं। यह कमजोरी आगे चलकर गंभीर ब्रेन हेमरेज या ब्लॉकेज का कारण बन सकती है। इसी वजह से डॉक्टर नियमित दवा और जीवनशैली नियंत्रण को बेहद जरूरी मानते हैं।इसके अलावा, गलत खानपान, तनाव, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इस जोखिम को और बढ़ा देती है। कई मरीज दवा नियमित नहीं लेते, जिससे खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर क्यों है सबसे बड़ा जोखिम
उच्च रक्तचाप धीरे-धीरे शरीर की रक्त वाहिकाओं को अंदर से नुकसान पहुंचाता है। समय के साथ नसों की दीवारें मोटी और कमजोर दोनों हो जाती हैं, जिससे उनका सामान्य कामकाज प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क में रक्तस्राव या रक्त प्रवाह रुकने की संभावना काफी बढ़ जाती है।यदि लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे तो हार्ट अटैक और किडनी फेल होने का खतरा भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि स्ट्रोक के मरीजों को लगातार निगरानी में रखा जाता है। डॉक्टर अक्सर नमक कम करने, वजन नियंत्रित रखने और नियमित व्यायाम की सलाह देते हैं।
नई रिसर्च में क्या पाया गया
हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने वाली नई कॉम्बिनेशन दवा का परीक्षण किया गया। इस दवा में तीन अलग-अलग रक्तचाप नियंत्रक दवाओं को कम मात्रा में एक ही गोली में शामिल किया गया है।हजारों मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में अलग-अलग देशों के लोग शामिल थे। सभी मरीज पहले स्ट्रोक से प्रभावित रह चुके थे और उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित नहीं था। परीक्षण को नियंत्रित वातावरण में लंबे समय तक मॉनिटर किया गया।
रिसर्च के नतीजे कितने प्रभावी रहे
जिन मरीजों ने यह नई कॉम्बिनेशन दवा ली, उनमें ब्लड प्रेशर नियंत्रण में स्पष्ट सुधार देखा गया। अध्ययन में पाया गया कि दोबारा स्ट्रोक का खतरा लगभग 40 प्रतिशत तक कम हुआ।इसके साथ ही मरीजों में दिल से जुड़ी जटिलताओं जैसे हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का जोखिम भी घटा। कई मरीजों में जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी कम पाई गई।हालांकि, कुछ मरीजों में हल्के साइड इफेक्ट भी देखे गए, जिन पर अभी और अध्ययन चल रहा है।
जीवनशैली में बदलाव क्यों जरूरी है
डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ दवा ही नहीं बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, कम नमक का सेवन, नियमित पैदल चलना और तनाव कम करना बहुत मददगार साबित होता है। धूम्रपान और शराब का सेवन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ा देता है, इसलिए इन्हें पूरी तरह छोड़ने की सलाह दी जाती है। नियमित जांच से बीमारी को समय पर नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की राय और जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नई खोज स्ट्रोक उपचार में एक बड़ी उम्मीद है, लेकिन इसे हर मरीज के लिए सामान्य इलाज नहीं माना जा सकता। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए इलाज भी अलग होना चाहिए। इस दवा के दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी और शोध की आवश्यकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेना जोखिमपूर्ण हो सकता है। विशेषकर बुजुर्ग मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
नई कॉम्बिनेशन दवा ने स्ट्रोक मरीजों के लिए एक नई उम्मीद पैदा की है। शोध के अनुसार यह दवा दोबारा स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।हालांकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों और सुरक्षा पर अभी अध्ययन जारी है। फिलहाल यह खोज मेडिकल साइंस में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है, जो भविष्य में लाखों मरीजों के लिए राहत लेकर आ सकती है।