एशियाई शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव, तेल कीमतों और वैश्विक तनाव का असर

अमेरिका-ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच एशियाई शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दक्षिण कोरिया और जापान के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चीन और हांगकांग के बाजारों में मजबूती दिखाई दी। निवेशकों की नजर अब तेल बाजार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व और एआई सेक्टर की वैल्यूएशन पर बनी हुई है।

एशियाई शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव, तेल कीमतों और वैश्विक तनाव का असर

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 30 जून 2026

एशियाई बाजारों में दिखी अस्थिरता

एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में मंगलवार को भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बने अंतरिम शांति समझौते के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी बाजारों पर दबाव बढ़ा दिया है।

कोस्पी और निक्केई में बड़ी गिरावट

कारोबार के दौरान दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक कोस्पी (KOSPI) लगभग 2 प्रतिशत तक लुढ़क गया। वहीं जापान का निक्केई (Nikkei) भी करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। दूसरी ओर हांगकांग और चीन के शेयर बाजारों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जिससे वहां के सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य हमले फिलहाल रुके हुए हैं, लेकिन निवेशकों को आशंका है कि दोनों देशों के बीच बना अंतरिम शांति समझौता कमजोर पड़ सकता है। इस अनिश्चितता ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव दोबारा बढ़ता है तो ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।

तेल कीमतों में फिर उछाल

वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 0.85 प्रतिशत बढ़कर लगभग 72.6 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 1 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया।हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतें युद्ध के चरम दौर की तुलना में अब काफी नीचे हैं, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बाजार अभी भी सतर्क बना हुआ है।

भारतीय बाजार के लिए क्या संकेत

वैश्विक बाजारों में कमजोरी और तेल कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। शुरुआती संकेतों के अनुसार निफ्टी में सकारात्मक शुरुआत की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुल सकता है, जबकि बैंकिंग शेयरों में भी मजबूती देखने को मिल सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतक और मजबूत निवेशक भागीदारी भारतीय बाजार को वैश्विक दबावों के बीच सहारा दे रही है।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर

निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर भी टिकी हुई है। बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि यदि फेड ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखता है या दरों में बदलाव के संकेत देता है तो वैश्विक पूंजी बाजारों पर असर पड़ सकता है। ऊंची ब्याज दरें कंपनियों की कमाई और निवेश गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।

एआई सेक्टर की वैल्यूएशन भी चिंता का कारण

तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की कंपनियों के बढ़े हुए मूल्यांकन को लेकर भी निवेशकों में चिंता बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में एआई कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिसके चलते कई विशेषज्ञ इनकी वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

वैश्विक बाजारों में बनी रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तेल कीमतों, अमेरिका-ईरान संबंधों, फेडरल रिजर्व की नीतियों और तकनीकी क्षेत्र की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। इन कारकों के आधार पर एशियाई और वैश्विक शेयर बाजारों की दिशा तय हो सकती है।