पेंशन खाते में दिखे 759 करोड़, 82 साल के बुजुर्ग के उड़ गए होश!
बिहार के मुजफ्फरपुर में 82 वर्षीय पेंशनधारक कामेश्वर मिश्रा और उनके दिव्यांग पुत्र के बैंक खातों में अचानक 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने से हड़कंप मच गया। बैंक ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
दि राइजिंग न्यूज़ | बिहार | 13 जुलाई 2026
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड स्थित थतिया सिहो गांव में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब गांव के रहने वाले 82 वर्षीय पेंशनधारक कामेश्वर मिश्रा के बैंक खाते में अचानक 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने लगी। यह घटना उस समय सामने आई जब वह अपनी नियमित पेंशन की राशि निकालने के लिए जन सेवा केंद्र पहुंचे थे। पेंशन निकालने के बाद उन्होंने सामान्य प्रक्रिया के तहत अपने खाते का शेष धन देखने की इच्छा जताई। जैसे ही संचालक ने खाते की जानकारी निकाली, स्क्रीन पर दिखाई दे रही राशि देखकर वहां मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए।
\कामेश्वर मिश्रा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के लाभार्थी हैं और कई वर्षों से नियमित रूप से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वह बेहद साधारण जीवन जीते हैं और गांव में एक सम्मानित व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। इतनी बड़ी धनराशि उनके खाते में दिखाई देने की घटना ने पूरे गांव में चर्चा का विषय बना दिया। कुछ ही समय में यह खबर आसपास के इलाकों में भी फैल गई और लोग इस घटना की सच्चाई जानने के लिए उत्सुक हो गए।
दिव्यांग पुत्र के खाते में भी दिखाई दी 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि
घटना के समय कामेश्वर मिश्रा के साथ उनका दिव्यांग पुत्र भी मौजूद था। पिता के खाते में करोड़ों रुपये दिखाई देने के बाद उत्सुकतावश पुत्र का बैंक खाता भी जांचा गया। सभी लोग उस समय और अधिक हैरान रह गए जब उसके खाते में भी लगभग 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदर्शित होने लगी। दोनों खातों में कुल मिलाकर लगभग पंद्रह सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई दे रही थी।एक ही परिवार के दो अलग-अलग खातों में एक जैसी भारी धनराशि दिखाई देने के बाद जन सेवा केंद्र पर मौजूद लोगों को पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। कई बार खाते की जानकारी दोबारा देखी गई, लेकिन हर बार वही राशि दिखाई देती रही। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामला सामान्य नहीं है और इसकी जानकारी तुरंत बैंक अधिकारियों को देना आवश्यक है।
कामेश्वर मिश्रा ने दिखाई ईमानदारी, तुरंत बैंक अधिकारियों को दी सूचना
इतनी बड़ी धनराशि देखकर जहां कोई भी व्यक्ति असमंजस में पड़ सकता था, वहीं कामेश्वर मिश्रा ने पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत बैंक अधिकारियों और संबंधित विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि यदि यह किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि है तो उसे जल्द से जल्द ठीक किया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।कामेश्वर मिश्रा ने बताया कि उन्हें बिल्कुल भी समझ नहीं आया कि उनके खाते में इतनी बड़ी राशि कैसे दिखाई देने लगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह धन उनका नहीं है और यदि किसी प्रणालीगत त्रुटि के कारण ऐसा हुआ है तो बैंक को तत्काल इसकी जांच करनी चाहिए। उनकी इस ईमानदारी की स्थानीय लोग भी सराहना कर रहे हैं।
बैंक अधिकारियों ने शुरू की जांच, तकनीकी गड़बड़ी की जताई जा रही आशंका
घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बैंक और अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। प्रारंभिक स्तर पर माना जा रहा है कि यह बैंक की संगणकीय प्रणाली अथवा सेवा तंत्र में आई किसी तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम हो सकता है। कभी-कभी सर्वर अथवा आंकड़ा प्रसंस्करण प्रणाली में त्रुटि आने के कारण खातों में वास्तविक शेष धन के स्थान पर गलत राशि दिखाई देने लगती है। हालांकि ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन जब भी होती हैं तो खाताधारकों और बैंक दोनों के लिए चिंता का विषय बन जाती हैं। इसलिए इस मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।
बिहार में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे चौंकाने वाले मामले
यह पहली घटना नहीं है जब बिहार में किसी बैंक खाते में अचानक सैकड़ों करोड़ रुपये दिखाई दिए हों। इससे पहले गया जिले के डेल्हा क्षेत्र में रहने वाले एक ई-रिक्शा चालक शिव कुमार पटेल के खाते में भी लगभग 759 करोड़ रुपये दिखाई देने का मामला सामने आया था। उस समय भी काफी चर्चा हुई थी और बाद में बैंक ने इसे तकनीकी त्रुटि बताया था।इसी प्रकार वैशाली और समस्तीपुर जिलों में भी कुछ पेंशनधारकों के खातों में सात सौ चालीस करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन सभी मामलों में बाद में जांच के दौरान तकनीकी गड़बड़ी की बात सामने आई थी। लगातार इस प्रकार की घटनाएं सामने आने के कारण बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता और तकनीकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तकनीकी गड़बड़ी के कारण खातों में इस प्रकार की असामान्य राशि दिखाई देती है तो इससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। विशेष रूप से पेंशनधारक, वरिष्ठ नागरिक और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ऐसी घटनाओं से मानसिक रूप से परेशान हो सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि बैंक अपनी तकनीकी व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित तथा त्रुटिरहित बनाए।बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और आंकड़ा प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर प्रणाली का परीक्षण और निगरानी की जाए ताकि इस प्रकार की त्रुटियां दोबारा सामने न आएं और लोगों का बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगा वास्तविक कारण
फिलहाल संबंधित बैंक और विभाग इस पूरे मामले की गहन जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट रूप से बताया जा सकेगा कि इतनी बड़ी राशि खाते में क्यों दिखाई दी। संभावना यही जताई जा रही है कि यह केवल तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम है और खातों में वास्तव में इतनी धनराशि जमा नहीं हुई है।जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि तकनीकी त्रुटि की पुष्टि होती है तो बैंक द्वारा संबंधित खातों का शेष धन सामान्य कर दिया जाएगा। वहीं यदि किसी अन्य कारण का पता चलता है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर बैंक और संबंधित विभाग की नजर बनी हुई है।