नीट यूजी पेपर लीक में बड़ा खुलासा, जांच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी तक पहुंची, कई प्रोफेसर और अधिकारी रडार पर
नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में केवल बाहरी लोग ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। मामले में कई प्रोफेसर और कोचिंग सेंटर संचालक जांच के दायरे में हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 16 मई 2026
नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच में अब यह मामला राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में केवल बाहरी लोग ही नहीं बल्कि एजेंसी के अंदर कार्यरत कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। इससे परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार लातूर के एक प्रोफेसर कुलकर्णी पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। उनके साथ दो अन्य प्रोफेसरों के नाम भी जांच के दायरे में सामने आए हैं। इसके अलावा एजेंसी के भीतर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लगभग पचास कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची भी जांच के पास मौजूद है, जिनकी भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
लातूर से हुई गिरफ्तारी, कोचिंग नेटवर्क भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान प्रोफेसर कुलकर्णी को पुणे स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार उनके पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी और वे कोचिंग से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय थे। जांच में यह भी सामने आया है कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में उन्होंने एक अन्य आरोपी की मदद से कुछ छात्रों को एकत्र किया था, जहां उन्हें प्रश्न और उनके उत्तर पहले से पढ़ाए गए थे।जांच एजेंसी का कहना है कि इन विशेष कक्षाओं में छात्रों को प्रश्न, विकल्प और सही उत्तर पहले से लिखवाए गए थे। बाद में यह प्रश्न नीट यूजी 2026 परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि पेपर लीक केवल बाहरी स्तर पर नहीं बल्कि संगठित तरीके से किया गया था।
चार वर्ष पहले हो चुके थे सेवानिवृत्त प्रोफेसर
सूत्रों के अनुसार प्रोफेसर कुलकर्णी चार वर्ष पहले एक प्रतिष्ठित महाविद्यालय से सेवानिवृत्त हो चुके थे। वह पहले रसायन विज्ञान विषय के प्रश्नपत्र निर्माण से जुड़ी समिति का हिस्सा भी रह चुके हैं। इसी कारण उन्हें परीक्षा प्रक्रिया की गहन जानकारी थी, जिसका कथित रूप से दुरुपयोग किए जाने की जांच की जा रही है।जांच एजेंसी अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या प्रश्नपत्र निर्माण और वितरण प्रक्रिया में किसी स्तर पर जानबूझकर लापरवाही या मिलीभगत की गई थी। इस मामले ने पूरे शिक्षा तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं और कई स्तरों पर जांच तेज कर दी गई है।
कोचिंग सेंटर संचालक से भी पूछताछ
इस मामले में एक बड़े कोचिंग सेंटर संचालक से भी पूछताछ की गई है। जांच एजेंसी ने उनके आवास पर पहुंचकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की है। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में कोचिंग संस्थानों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है।जांच एजेंसी का फोकस अब इस बात पर है कि आखिर प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचे और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। पूरे देश में इस घटना को लेकर शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।