धुंधली कॉपियां देखकर दिए नंबर, लाखों छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल

सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। वरिष्ठ एग्जामिनर ने दावा किया कि कई कॉपियां धुंधली थीं और अंदाजे से नंबर देने पड़े। गायब पन्नों, तकनीकी खराबी और कम नंबरों को लेकर छात्रों में भारी नाराजगी है। शिक्षा मंत्री ने भी गड़बड़ियों को स्वीकार करते हुए री-इवैल्यूएशन का भरोसा दिया है।

धुंधली कॉपियां देखकर दिए नंबर, लाखों छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 29 मई 2026

सीबीएसई के 12वीं बोर्ड रिजल्ट को लेकर देशभर में मचे विवाद के बीच अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पिछले 25 वर्षों से कॉपियां जांच रहे वरिष्ठ एग्जामिनर जीके श्रीवास्तव ने बोर्ड की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका दावा है कि इस बार छात्रों की कॉपियां इतनी धुंधली थीं कि कई जगह परीक्षकों को अंदाजे से नंबर देने पड़े। इस खुलासे के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। रिजल्ट में भारी गिरावट और मेधावी छात्रों के कम नंबर आने को लेकर अब सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली कटघरे में आ गई है।


“ब्लर थीं कॉपियां, फॉर्मूले तक नहीं दिखे”

वरिष्ठ एग्जामिनर जीके श्रीवास्तव के मुताबिक सीबीएसई ने बिना पूरी तैयारी और पर्याप्त ट्रेनिंग के डिजिटल सिस्टम लागू कर दिया। उन्होंने बताया कि कॉपियां जांचते समय लगातार तकनीकी दिक्कतें आती रहीं। श्रीवास्तव ने दावा किया कि कई कॉपियां इतनी ब्लर थीं कि छात्रों की लिखावट और फॉर्मूले साफ दिखाई ही नहीं दे रहे थे। उन्होंने कहा कि फिजिक्स जैसे विषयों में कई बार फॉर्मूले अधूरे नजर आ रहे थे, जिसके कारण परीक्षकों को अनुभव और अंदाजे के आधार पर नंबर देने पड़े।


7 दिन की ट्रेनिंग में शुरू कर दी चेकिंग

उन्होंने बताया कि इतने बड़े डिजिटल सिस्टम को संभालने के लिए शिक्षकों को सिर्फ 7 से 10 दिन की ट्रेनिंग दी गई। कई पुराने शिक्षक इस टेक्निकल प्रक्रिया को ठीक से समझ ही नहीं पाए। परीक्षकों का कहना है कि सिस्टम बार-बार हैंग हो रहा था, पेज खुलने में समय लग रहा था और कई बार कॉपियों के पन्ने गायब मिल रहे थे। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।


गायब पन्ने और खाली स्क्रीन से बढ़ा विवाद

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि कई छात्रों की सप्लीमेंट्री कॉपियों के पन्ने सिस्टम में दिखाई ही नहीं दिए। कुछ जगह पेज नंबर 3 के बाद सीधे पेज नंबर 5 दिखाई दे रहा था। वरिष्ठ परीक्षक ने दावा किया कि कई छात्रों द्वारा लिखे गए पूरे पन्ने स्क्रीन पर पूरी तरह खाली नजर आ रहे थे। इससे हजारों छात्रों के नंबर कटने की आशंका जताई जा रही है।


नीट में 650 नंबर, बोर्ड में फेल जैसी स्थिति

रिपोर्ट के मुताबिक कई ऐसे छात्र हैं जो नीट जैसी कठिन परीक्षा में 650 से ज्यादा अंक ला रहे हैं, लेकिन सीबीएसई बोर्ड में फिजिक्स जैसे विषयों में उन्हें 40-45 नंबर ही मिले हैं। इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा है। कई छात्र अपनी स्कैन कॉपियां देखकर मानसिक तनाव में चले गए हैं।


शिक्षा मंत्री ने मानी जिम्मेदारी

विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी मूल्यांकन में तकनीकी खामियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि इस साल करीब 17 लाख छात्रों की 98 लाख कॉपियों का डिजिटल मूल्यांकन कराया गया था और अब बड़े स्तर पर री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और हर शिकायत की जांच की जाएगी।


राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि सीबीएसई का ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट जिस कंपनी को दिया गया, उसका बैकग्राउंड ठीक से क्यों नहीं जांचा गया। वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष डिजिटल इंडिया अभियान को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।