कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, फिर बढ़ने का अलर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में आपूर्ति और मांग के संतुलन के चलते तेल फिर महंगा हो सकता है।

कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, फिर बढ़ने का अलर्ट

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 17 जून 2026

शांति समझौते के बाद टूटा कच्चा तेल

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल एवं गैस की आपूर्ति फिर से शुरू होने के बाद निवेशकों की चिंताएं घटी हैं, जिससे तेल के दाम नीचे आए हैं।

एक दिन में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में सोमवार को लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। तेल का भाव गिरकर करीब 80.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। मंगलवार को कीमतों में मामूली सुधार देखने को मिला, लेकिन इसके बावजूद ब्रेंट क्रूड लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा।

फिर बढ़ सकती हैं कीमतें

हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल ने भविष्य को लेकर चेतावनी जारी की है। फर्म का कहना है कि वैश्विक बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन बना हुआ है। यदि चीन सहित अन्य प्रमुख बाजारों की मांग तेजी से बढ़ती है और आपूर्ति सामान्य होने में देरी होती है, तो आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें फिर 90 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर जा सकती हैं।

होर्मुज मार्ग सामान्य होने में लगेगा समय

विशेषज्ञों के अनुसार मध्य पूर्व संकट समाप्त होने के बावजूद तेल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ता है।

अगले वित्त वर्ष के लिए अनुमान

एमके ग्लोबल ने अपने अनुमान में कहा है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में तेल की कीमतें अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। फर्म ने औसत कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है। वहीं दूसरी छमाही में यह औसत 85 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। पूरे वित्त वर्ष के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 90 डॉलर प्रति बैरल रखा गया है।

बाद में मिल सकती है राहत

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही के बाद बाजार में स्थिरता लौटने की संभावना है। यदि आपूर्ति सामान्य रहती है और उत्पादन पर्याप्त स्तर पर बना रहता है तो वर्ष के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

ट्रंप का बड़ा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि होर्मुज मार्ग अब बिना किसी बाधा के खुला रहेगा। उन्होंने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को संकेत देते हुए कहा कि जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू की जाए और तेल की आपूर्ति बहाल रखी जाए।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर रहेगा असर

कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था, परिवहन लागत और ईंधन कीमतों को सीधे प्रभावित करती हैं। ऐसे में आने वाले सप्ताहों में तेल बाजार की दिशा पर निवेशकों, सरकारों और ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल बाजार को राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर अभी समाप्त नहीं हुआ है।