पहचान पूछकर मारी गोली कुलगाम हमले पर बड़ा दावा
गाजा में हालिया हिंसा के बीच अस्पताल के बाहर अफरा-तफरी और दुख का माहौल देखने को मिला। घायल और मृत लोगों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्साकर्मी और स्थानीय लोग राहत कार्यों में जुटे रहे। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | कुलगाम | 01 अगस्त 2026
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर हुए आतंकी हमले को लेकर नया दावा सामने आया है। मृतक मजदूरों के परिजनों का आरोप है कि हमलावरों ने गोली चलाने से पहले उनकी पहचान, जाति और धर्म के बारे में पूछताछ की थी। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद पूरे देश में आक्रोश है और राजनीतिक दलों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
कुलगाम आतंकी हमले ने देश को झकझोरा
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे प्रवासी मजदूरों पर हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की जान चली गई, जबकि घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। सुरक्षा बलों ने इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया है और हमलावरों की तलाश जारी है।यह हमला ऐसे समय हुआ है जब घाटी में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्दोष मजदूरों को निशाना बनाना आतंकवादियों की कायराना मानसिकता को दर्शाता है।
पहचान पूछने के बाद गोली मारने का आरोप
मृतक मजदूरों के परिजनों ने दावा किया है कि हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने से पहले मजदूरों की पहचान पूछी थी। परिजनों का आरोप है कि जाति और धर्म से जुड़ी जानकारी लेने के बाद उन्हें निशाना बनाया गया। इस दावे के सामने आने के बाद घटना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।हालांकि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
छत्तीसगढ़ के थे दोनों मृतक मजदूर
हमले में जान गंवाने वाले दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे। वे अपने परिवारों के बेहतर भविष्य और रोजगार की तलाश में जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। स्थानीय स्तर पर काम कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन आतंकियों ने उन्हें निशाना बना लिया।परिजनों के अनुसार मृतकों के परिवार पूरी तरह उनकी आय पर निर्भर थे। घटना के बाद गांवों में शोक का माहौल है और लोगों में आतंकियों के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
राजनीतिक दलों ने की कड़ी निंदा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेताओं ने इस हमले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि निर्दोष मजदूरों की हत्या मानवता के खिलाफ अपराध है और दोषियों को कठोरतम सजा मिलनी चाहिए। राजनीतिक दलों ने सरकार से आतंकियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है।नेताओं का कहना है कि ऐसी घटनाएं केवल लोगों में भय पैदा करने के उद्देश्य से की जाती हैं। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ और अधिक प्रभावी रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने किया सहायता का ऐलान
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। सरकार की ओर से दोनों परिवारों को दस-दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों को हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी और पूरे मामले की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं व्यापक जांच
घटना के बाद सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों ने पूरे इलाके में व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। हमले में शामिल आतंकियों की पहचान और उनके नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।अधिकारियों का कहना है कि जांच में तकनीकी और खुफिया दोनों प्रकार की सहायता ली जा रही है। जल्द ही पूरे घटनाक्रम से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
घाटी में शांति बनाए रखने की अपील
घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा और किसी भी निर्दोष व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाएगा। ऐसे हमलों का उद्देश्य समाज में भय और विभाजन पैदा करना होता है। इसलिए लोगों को एकजुट रहकर आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
मुख्य बिंदु
- कुलगाम में प्रवासी मजदूरों पर आतंकी हमला।
- परिजनों ने पहचान पूछकर गोली मारने का लगाया आरोप।
- दो मजदूरों की मौत से देशभर में आक्रोश।
- सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू की व्यापक जांच।
- मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दस-दस लाख रुपये सहायता की घोषणा की।
- राजनीतिक दलों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।