ढाई करोड़ की कार से पहुंचे, 45 रुपये का गमला उठा ले गए! मुख्यमंत्री बोले- यह चोरी का नया मॉडल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सरकारी संपत्ति की चोरी के मामलों पर सख्त टिप्पणी करते हुए एक दिलचस्प उदाहरण साझा किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग करोड़ों रुपये की लग्जरी कारों में आते हैं और सरकारी परिसरों से मामूली कीमत की वस्तुएं तक चुरा लेते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे "चोरी का नया मॉडल" बताते हुए सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया।

ढाई करोड़ की कार से पहुंचे, 45 रुपये का गमला उठा ले गए! मुख्यमंत्री बोले- यह चोरी का नया मॉडल

दि राइजिंग न्यूज | लखनऊ । 26 मई 2026

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और उनके संरक्षण को लेकर अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है। एक समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी परिसरों से होने वाली छोटी-बड़ी चोरियों का जिक्र करते हुए एक ऐसा उदाहरण साझा किया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग करोड़ों रुपये की लग्जरी कारों में आते हैं और सरकारी परिसरों से मामूली कीमत के गमले तक उठा ले जाते हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रवृत्ति को "चोरी का नया मॉडल" बताते हुए इसे सामाजिक सोच और नैतिकता से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

मुख्यमंत्री ने सुनाया चौंकाने वाला उदाहरण

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज और प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है। उन्होंने बताया कि कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी सरकारी परिसरों से छोटी-छोटी वस्तुएं चुरा लेते हैं। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक व्यक्ति ढाई करोड़ रुपये की महंगी कार में आया, लेकिन सरकारी परिसर से मात्र 45 रुपये कीमत का गमला उठाकर चला गया। उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि समस्या आर्थिक स्थिति की नहीं, बल्कि मानसिकता की है।

सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी भवनों, पार्कों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर रखी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति जनता के कर के पैसे से तैयार की जाती है और इसका नुकसान सीधे जनता के हितों को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चाहे कोई व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि वह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या उसकी चोरी करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

करोड़ों की कार और 45 रुपये का गमला बना चर्चा का विषय

मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया उदाहरण अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये की संपत्ति का मालिक हो सकता है, तो फिर वह इतनी कम कीमत की वस्तु चोरी करने की मानसिकता क्यों रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि समाज में नैतिक मूल्यों और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

सार्वजनिक संपत्ति जनता की संपत्ति है

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत शहरों और गांवों में सौंदर्यीकरण, पार्क निर्माण, सड़क विकास और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं पर भारी धनराशि खर्च करती है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। यदि ऐसे स्थानों से पौधे, गमले, बेंच, लाइटें या अन्य सामान चोरी होने लगें, तो इससे सरकारी संसाधनों का नुकसान होता है और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी संपत्ति समझें और उनकी सुरक्षा में सहयोग करें। यदि कहीं कोई व्यक्ति सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाता दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए।

अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ाने, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आवश्यक स्थानों पर निगरानी उपकरण लगाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि छोटी घटनाओं को नजरअंदाज करना आगे चलकर बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों के संरक्षण के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा। तभी सार्वजनिक संसाधनों का सही उपयोग और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सामाजिक सोच पर भी उठे सवाल

मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद सार्वजनिक संपत्ति के प्रति लोगों की जिम्मेदारी और सामाजिक व्यवहार को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी जरूरी है।, जब तक लोग सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी सामूहिक संपत्ति नहीं मानेंगे, तब तक ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होगा। मुख्यमंत्री द्वारा साझा किया गया 45 रुपये के गमले और ढाई करोड़ रुपये की कार का उदाहरण केवल एक घटना नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है। यह मामला बताता है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सरकार अब ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी और कार्रवाई की तैयारी कर रही है, ताकि जनता के धन से बनाई गई सुविधाओं का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।