अब नहीं बजेगा फोन पर इमरजेंसी अलर्ट

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मोबाइल फोन पर भेजे जाने वाले सेल ब्रॉडकास्ट इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को अगली सूचना तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह सेवा आपदा और आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों को तुरंत चेतावनी देने के लिए शुरू की गई थी।

अब नहीं बजेगा फोन पर इमरजेंसी अलर्ट

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जून 2026

अब नहीं बजेगा फोन पर इमरजेंसी अलर्ट

मोबाइल फोन पर अचानक तेज आवाज के साथ दिखाई देने वाले इमरजेंसी अलर्ट संदेशों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह सेवा मई 2026 में आधिकारिक रूप से शुरू की गई थी और इसके जरिए देशभर के नागरिकों को आपदा तथा आपातकालीन परिस्थितियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी तुरंत पहुंचाई जा रही थी।

एहतियात के तौर पर लिया गया फैसला

एनडीएमए के अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय सावधानी के तौर पर लिया गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। हालांकि प्राधिकरण की ओर से इस सेवा को अस्थायी रूप से बंद करने के पीछे किसी विशेष कारण का खुलासा नहीं किया गया है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि तकनीकी प्रक्रियाओं और संचालन व्यवस्था की समीक्षा के लिए यह कदम उठाया गया हो सकता है। सरकारी एजेंसियां इस प्रणाली की कार्यप्रणाली का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं ताकि भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी तथा सुरक्षित बनाया जा सके। समीक्षा पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि सेवा को दोबारा कब शुरू किया जाएगा।

क्या है सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस

सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस एक ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से किसी विशेष क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक एक साथ संदेश पहुंचाया जा सकता है। यह पारंपरिक एसएमएस प्रणाली से पूरी तरह अलग है। इसके तहत मोबाइल स्क्रीन पर उच्च प्राथमिकता वाला संदेश अचानक दिखाई देता है और साथ में तेज चेतावनी ध्वनि भी बजती है। कई स्मार्टफोन में यह प्रणाली संदेश को आवाज में पढ़कर भी सुनाती है ताकि दृष्टिबाधित या अन्य उपयोगकर्ता भी अलर्ट को समझ सकें। इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे इंटरनेट कनेक्शन या सामान्य मोबाइल डेटा सेवा की आवश्यकता नहीं होती।

आपदा के समय बड़ी भूमिका

सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान लोगों को तुरंत चेतावनी देना है। हाल ही में उत्तर भारत के कई राज्यों में तेज आंधी तूफान और ओलावृष्टि की घटनाओं के दौरान इस प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था। अलर्ट संदेशों के माध्यम से लोगों को खराब मौसम की जानकारी पहले से मिल जाती थी, जिससे वे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा सकें। इसके अलावा भूकंप, बाढ़, चक्रवात, सुनामी और अन्य आपदाओं के दौरान भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।

मई में हुई थी शुरुआत

सरकार ने मई 2026 की शुरुआत में इस सेवा को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया था। लॉन्चिंग के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों मोबाइल उपयोगकर्ताओं को परीक्षण और वास्तविक अलर्ट संदेश भेजे गए थे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अचानक बजने वाली तेज आवाज और स्क्रीन पर दिखाई देने वाले संदेशों को साझा किया था। हालांकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने बार-बार आने वाले अलर्ट को लेकर असुविधा भी जताई थी।

कई एजेंसियों ने मिलकर किया विकास

सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स यानी सी-डॉट ने विकसित किया है। इस परियोजना में दूरसंचार विभाग, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और गृह मंत्रालय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का उद्देश्य था कि किसी भी आपदा या राष्ट्रीय आपात स्थिति में नागरिकों तक सूचना पहुंचाने के लिए एक तेज और भरोसेमंद माध्यम उपलब्ध कराया जा सके। इसी सोच के तहत इस आधुनिक चेतावनी प्रणाली को तैयार किया गया।

एसएमएस से कैसे अलग है यह तकनीक

पारंपरिक एसएमएस प्रणाली में संदेश एक-एक उपयोगकर्ता को भेजे जाते हैं, जिसके कारण भारी ट्रैफिक के समय संदेश पहुंचने में देरी हो सकती है। इसके विपरीत सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक एक साथ हजारों या लाखों मोबाइल उपकरणों तक तुरंत संदेश पहुंचाने में सक्षम है। यह प्रणाली मोबाइल नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव पड़ने की स्थिति में भी प्रभावी रहती है। किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी लोगों तक कुछ ही सेकंड में चेतावनी पहुंचाई जा सकती है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में आपदा प्रबंधन के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

फिलहाल सेवा रहेगी बंद

एनडीएमए की ताजा एडवाइजरी के बाद देशभर में सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस फिलहाल बंद रहेगी। जब तक नई घोषणा नहीं होती तब तक मोबाइल उपयोगकर्ताओं को इस प्रणाली के माध्यम से कोई इमरजेंसी अलर्ट प्राप्त नहीं होगा।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी समीक्षा पूरी होने के बाद सरकार इस सेवा को और बेहतर स्वरूप में दोबारा शुरू कर सकती है, क्योंकि आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।