जंतर-मंतर पर आंदोलन के लिए क्या कोई भी ले सकता है अनुमति? जानिए नियम और पूरी प्रक्रिया
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करने के लिए प्रशासनिक अनुमति जरूरी होती है। जानिए कौन कर सकता है प्रदर्शन, कैसे मिलती है मंजूरी और क्या हैं इसके प्रमुख नियम।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 6 जून 2026
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां नागरिकों को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर वर्षों से विभिन्न संगठनों, सामाजिक समूहों, छात्र संगठनों और नागरिक मंचों के लिए विरोध प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर-मंतर पर किए जा रहे प्रदर्शन के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या कोई भी व्यक्ति या संगठन यहां आंदोलन कर सकता है और इसके लिए अनुमति कैसे प्राप्त की जाती है।
जंतर-मंतर क्यों है विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र
नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर को लंबे समय से लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का प्रतीक माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से लोग अपनी मांगों और समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने के लिए यहां प्रदर्शन करते रहे हैं। यह स्थान संसद, केंद्रीय मंत्रालयों और प्रशासनिक संस्थानों के निकट होने के कारण विशेष महत्व रखता है। इसी वजह से यहां होने वाले आंदोलनों पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की विशेष नजर रहती है।
क्या कोई भी व्यक्ति जंतर-मंतर पर आंदोलन कर सकता है
संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति के जंतर-मंतर पर धरना या प्रदर्शन शुरू कर सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्वीकृति आवश्यक होती है। बिना अनुमति किए गए प्रदर्शन को नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और प्रशासन कार्रवाई भी कर सकता है।
आंदोलन के लिए अनुमति लेना क्यों जरूरी होता है
राजधानी दिल्ली में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। ऐसे में किसी भी बड़े प्रदर्शन का असर यातायात, सुरक्षा व्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ सकता है। इसी कारण प्रशासन प्रदर्शन से पहले उसकी प्रकृति, संभावित भीड़ और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन करता है। अनुमति प्रक्रिया का उद्देश्य प्रदर्शन को रोकना नहीं बल्कि उसे व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संचालित करना होता है।
अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है
किसी भी संगठन या समूह को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस के समक्ष औपचारिक आवेदन प्रस्तुत करना होता है। आवेदन में प्रदर्शन का उद्देश्य, संभावित प्रतिभागियों की संख्या, समय और स्थान का उल्लेख किया जाता है। इसके साथ आयोजकों को आवश्यक दस्तावेज और संबंधित प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण भी प्रस्तुत करना पड़ सकता है। आवेदन की जांच के बाद प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार अनुमति प्रदान करता है।
आयोजकों को कौन-कौन सी जानकारी देनी होती है
प्रदर्शन आयोजित करने वाले समूह को एक जिम्मेदार प्रतिनिधि का नाम और संपर्क विवरण देना होता है, जो पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन के संपर्क में रहता है। इसके अलावा भीड़ प्रबंधन के लिए नियुक्त स्वयंसेवकों की सूची भी उपलब्ध करानी पड़ती है। सुरक्षा एजेंसियां इन जानकारियों के आधार पर आवश्यक व्यवस्था तैयार करती हैं और कार्यक्रम के दौरान समन्वय बनाए रखती हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए क्या नियम लागू होते हैं
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य होता है। प्रशासन आमतौर पर निश्चित समयावधि के भीतर ही प्रदर्शन की अनुमति देता है। प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सड़क अवरुद्ध करने या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की अनुमति नहीं होती। सभी प्रतिभागियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपेक्षा की जाती है।
भीड़ की संख्या पर भी रहता है नियंत्रण
सुरक्षा कारणों से प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या पर भी प्रशासन निगरानी रखता है। किसी भी आयोजन में संभावित भीड़ का पहले से अनुमान लिया जाता है। यदि भीड़ निर्धारित सीमा से अधिक होने की संभावना होती है तो अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाती है या फिर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। इसका उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना होता है।
किन वस्तुओं पर रहता है प्रतिबंध
जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले प्रदर्शनों में किसी भी प्रकार के हथियार, डंडे या हिंसा में इस्तेमाल हो सकने वाली वस्तुओं को ले जाने की अनुमति नहीं होती। प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे। सुरक्षा जांच के बाद ही लोगों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की अनुमति दी जाती है।
लोकतंत्र और कानून के बीच संतुलन जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन इसके साथ कानून और सार्वजनिक व्यवस्था का पालन भी उतना ही आवश्यक है। यही कारण है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए स्पष्ट नियम और प्रक्रियाएं निर्धारित की गई हैं। इन नियमों का पालन करते हुए नागरिक अपनी आवाज प्रभावी तरीके से सरकार तक पहुंचा सकते हैं।
जंतर-मंतर की भूमिका बनी हुई है महत्वपूर्ण
देश में बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य के बीच जंतर-मंतर आज भी जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का एक प्रमुख मंच बना हुआ है। विभिन्न मुद्दों पर यहां लगातार प्रदर्शन होते रहते हैं। प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच समन्वय बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाता है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान भी हो और सार्वजनिक व्यवस्था भी बनी रहे।