पीएम मोदी ने टलवाया परमाणु हमला पोलैंड के मंत्री का बड़ा दावा!
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने दावा किया है कि वर्ष 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सामरिक परमाणु हथियारों के उपयोग की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ऐसा कदम उठाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके इस बयान के बाद प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक भूमिका और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जुलाई 2026
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान वर्ष 2022 में उत्पन्न हुए सबसे गंभीर संकटों में से एक सामरिक परमाणु हथियारों के संभावित उपयोग का खतरा भी था। अब पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोशेव्स्की ने दावा किया है कि उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत कर उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उन गिने-चुने विश्व नेताओं में शामिल हैं जिनकी बात राष्ट्रपति पुतिन गंभीरता से सुनते हैं। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर भारत की कूटनीतिक भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक स्वीकार्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की पोलैंड ने खुलकर की सराहना
भारत-पोलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक के बाद नई दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोशेव्स्की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और कूटनीतिक नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व राजनीति में एक संतुलित, जिम्मेदार और भरोसेमंद शक्ति के रूप में उभर चुका है। वैश्विक संकटों के समय भारत ने हमेशा संवाद, शांति और सहयोग का मार्ग अपनाया है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा लगातार मजबूत हुई है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी का व्यक्तित्व और नेतृत्व विश्व के कई बड़े देशों के बीच विश्वास का प्रतीक बन चुका है।उन्होंने आगे कहा कि किसी भी बड़े संघर्ष को समाप्त करने के लिए केवल सैन्य शक्ति पर्याप्त नहीं होती, बल्कि विश्वसनीय संवाद और मजबूत कूटनीतिक संबंधों की आवश्यकता होती है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में यही भूमिका निभाई है और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी जिम्मेदार छवि प्रस्तुत की है। पोलैंड का मानना है कि भारत आने वाले समय में भी विश्व शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी की बात को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से लिया जाता है।
परमाणु हथियारों के उपयोग को लेकर किया बड़ा दावा
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2022 के अंतिम महीनों में रूस-यूक्रेन युद्ध बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया था। उस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि रूस सामरिक परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है। ऐसी स्थिति पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकती थी और इसका प्रभाव केवल यूरोप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ता।बार्टोशेव्स्की के अनुसार उसी कठिन समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से संवाद स्थापित किया और उन्हें संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत का सकारात्मक प्रभाव पड़ा और स्थिति और अधिक गंभीर होने से बच गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पोलैंड के वरिष्ठ मंत्री के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
भारत और रूस के दशकों पुराने संबंधों का दिखा प्रभाव
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के संबंध किसी एक सरकार या एक दौर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच कई दशकों से रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, अंतरिक्ष, व्यापार और सामरिक सहयोग के मजबूत रिश्ते बने हुए हैं। यही ऐतिहासिक संबंध दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आपसी विश्वास को और मजबूत बनाते हैं। राष्ट्रपति पुतिन भी भारत को लंबे समय से एक भरोसेमंद मित्र राष्ट्र के रूप में देखते हैं।उन्होंने कहा कि जब दो देशों के बीच विश्वास का मजबूत आधार होता है, तब कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी संवाद का रास्ता खुला रहता है। भारत ने हमेशा रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित तरीके से बनाए रखा है और साथ ही अन्य देशों के साथ भी अच्छे संबंध कायम रखे हैं। यही संतुलित विदेश नीति भारत को विश्व मंच पर एक प्रभावशाली देश बनाती है। पोलैंड का मानना है कि इस भरोसे का लाभ अंतरराष्ट्रीय संकटों को कम करने में भी मिलता है।
'आज का युग युद्ध का नहीं' वाला संदेश फिर बना चर्चा का विषय
पोलैंड के मंत्री के इस बयान के बाद वर्ष 2022 में उज्बेकिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन की वह ऐतिहासिक मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इसी सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से स्पष्ट शब्दों में कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश उस समय पूरी दुनिया में शांति और संवाद का प्रतीक बनकर उभरा था।विश्व के अनेक देशों ने इस बयान का स्वागत किया था और इसे युद्ध रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना था। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी माना कि भारत ने बिना किसी पक्ष का खुला समर्थन किए शांति स्थापित करने का प्रयास किया। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह वक्तव्य आज भी विश्व राजनीति में सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेशों में गिना जाता है। पोलैंड के मंत्री के ताजा बयान के बाद यह संदेश फिर से चर्चा का केंद्र बन गया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत ने हमेशा अपनाया संतुलित रुख
रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत ने किसी भी पक्ष का खुला समर्थन करने के बजाय संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई। भारत ने हर अवसर पर युद्ध समाप्त करने, बातचीत शुरू करने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की दोनों से अलग-अलग समय पर कई दौर की बातचीत की।भारत ने लगातार यह स्पष्ट किया कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता और सभी विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता से ही संभव है। इसी नीति के तहत भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। भारत की इस संतुलित भूमिका की कई देशों ने सराहना की और उसे जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बताया।
राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखी
युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए और अन्य देशों से भी सहयोग की अपेक्षा की। इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। भारत सरकार का कहना था कि देश की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।भारत के इस निर्णय से देश में ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी रही और वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच भी राहत मिली। रूस ने भी कई अवसरों पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और संतुलित दृष्टिकोण की सराहना की। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है, जिससे द्विपक्षीय संबंध और अधिक गहरे हुए हैं।
ईरान को लेकर भारत की नीति की भी हुई सराहना
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने केवल रूस-यूक्रेन युद्ध ही नहीं, बल्कि ईरान से जुड़े मुद्दों पर भी भारत के रुख की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा तनाव कम करने, संवाद बढ़ाने और कूटनीतिक समाधान पर जोर देता है। यही नीति अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।उन्होंने बताया कि पोलैंड भी ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार भारत और पोलैंड दोनों देशों की सोच काफी हद तक समान है और दोनों ही युद्ध के बजाय संवाद को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि विश्व में स्थायी शांति केवल बातचीत, सहयोग और आपसी विश्वास के माध्यम से ही स्थापित की जा सकती है।