यूपी के सात जिलों में पेट्रोल संकट से हड़कंप...
नेपाल में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण बड़ी संख्या में लोग उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में आकर तेल भरवा रहे हैं। इससे बलरामपुर समेत सात जिलों में ईंधन संकट गहरा गया है। कई पेट्रोल पंप बंद हैं और खुले पंपों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | बलरामपुर | 28 मई 2026
उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में पेट्रोल और डीजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नेपाल में ईंधन की कीमतें भारत से काफी ज्यादा होने के कारण बड़ी संख्या में नेपाली वाहन चालक सीमा पार कर उत्तर प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने पहुंच रहे हैं। इसका असर अब सीमावर्ती जिलों में साफ दिखाई देने लगा है, जहां कई पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं और खुले पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि आम लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा।
सात जिलों में गहराया ईंधन संकट
नेपाल सीमा से जुड़े महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिलों में ईंधन संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। करीब 580 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों पर ताले लटके दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर “पेट्रोल-डीजल उपलब्ध नहीं” के बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में हालात अचानक बिगड़े हैं और अब तेल मिलना मुश्किल होता जा रहा है।
यूपी के सात जिलों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
नेपाल सीमा से जुड़े महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिलों में पेट्रोल-डीजल संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल में ईंधन की कीमतें ज्यादा होने के कारण बड़ी संख्या में लोग भारत आकर तेल भरवा रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि कई पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो गया, जबकि खुले पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। स्थानीय लोगों, किसानों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल में महंगा ईंधन बना बड़ी वजह
जानकारी के मुताबिक, नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमत भारत की तुलना में 35 से 50 रुपये प्रति लीटर तक ज्यादा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में नेपाली वाहन चालक भारत आकर अपने वाहनों की टंकी भरवा रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में अचानक बढ़ी मांग के कारण आपूर्ति व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया है। कई पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि रोजाना सामान्य से कई गुना ज्यादा ईंधन की मांग हो रही है।
खुले पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
दि राइजिंग न्यूज़ की पड़ताल में सामने आया कि जहां पेट्रोल पंप खुले हैं, वहां भारी भीड़ और अव्यवस्था का माहौल है। लोग कई-कई घंटे लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। कुछ जगहों पर वाहन चालकों के बीच कहासुनी और विवाद की स्थिति भी बन रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जरूरत के समय ईंधन नहीं मिलने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
किसानों और परिवहन कारोबार पर असर
डीजल संकट का असर अब खेती और परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। किसानों का कहना है कि खेतों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के लिए पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है। वहीं ट्रक चालकों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं दिया जा रहा। कई स्थानों पर एक वाहन को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, जिससे माल ढुलाई प्रभावित होने लगी है।
ईंधन वितरण पर लगानी पड़ी सीमा
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अब ईंधन वितरण पर सीमा तय करनी पड़ रही है। कुछ पंपों पर एक वाहन को तय मात्रा से ज्यादा पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जा रहा। संचालकों के मुताबिक, यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। सीमावर्ती जिलों में ईंधन की बढ़ती खपत ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
जिला प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य करने की कोशिशें की जा रही हैं। नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया गया है और वाहनों की निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध तरीके से ईंधन ले जाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। प्रशासन जल्द हालात सामान्य होने का दावा कर रहा है।
तेल नहीं मिलने से बढ़ी लोगों की परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कमी के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं। कई लोगों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी किसानों, ट्रक चालकों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द स्थिति सामान्य नहीं हुई तो संकट और गहरा सकता है।