दि राइजिंग न्यूज डेस्क। 13 अप्रैल, 2026 ।
उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अखिलेश यादव ने दी तीखी प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री के उस बयान को घेर लिया, जिसमें नोएडा के मजदूर आंदोलन को “साज़िश” बताया गया था।
अखिलेश ने सवाल उठाया कि:
- अगर यह आंदोलन साज़िश है, तो खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं?
- क्या राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार मजदूरों की समस्याओं को समझने के बजाय उन्हें बदनाम करने में लगी है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा: “अगर आपसे प्रदेश नहीं संभल रहा है तो ससम्मान गद्दी छोड़ दीजिए, नहीं तो जनता खुद उतार देगी।”
उन्होंने भाजपा सरकार पर महंगाई, भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए कहा कि “डबल इंजन सरकार अब जनता के लिए ट्रबल इंजन बन चुकी है।”
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि:
- मजदूर पहले से ही महंगाई और आर्थिक दबाव में हैं
- ऐसे समय में उन पर “नक्सलवाद” जैसे आरोप लगाना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है
- सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
सीएम योगी के इस बयान पर भड़का विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुजफ्फरनगर में कहा था कि:
- औद्योगिक अशांति फैलाने वालों से सावधान रहने की जरूरत है
- सरकार उद्यमियों की सुरक्षा और श्रमिकों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है
हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार जमीनी हकीकत से दूर है और असली मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है।
प्रदेश में बढ़ा राजनैतिक पारा
नोएडा श्रमिक आंदोलन अब केवल श्रमिकों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
- एक तरफ सरकार “साज़िश” का एंगल बता रही है
- वहीं विपक्ष इसे प्रशासनिक विफलता और जनविरोधी नीतियों का नतीजा बता रहा है