पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का अंतिम प्रमाण

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय ने नागरिकता से जुड़े कानूनी प्रावधानों और पासपोर्ट सेवाओं के विस्तार की जानकारी भी साझा की।

पासपोर्ट नहीं है नागरिकता का अंतिम प्रमाण

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 25 जून 2026

विदेश मंत्रालय ने दी महत्वपूर्ण स्पष्टता

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है और इसे भारतीय नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर जारी जानकारी में मंत्रालय ने नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट की।मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाना है, न कि नागरिकता का अंतिम निर्धारण करना।

सरकार की संपत्ति होता है पासपोर्ट

विदेश मंत्रालय के अनुसार पासपोर्ट किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं माना जाता। यह भारत सरकार की संपत्ति होती है और निर्धारित परिस्थितियों में सरकार इसे वापस भी ले सकती है।मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट धारक को विदेश यात्रा और पहचान संबंधी सुविधाएं प्रदान करता है, लेकिन केवल पासपोर्ट के आधार पर नागरिकता का अंतिम दावा नहीं किया जा सकता।

नागरिकता कानून क्या कहता है

भारतीय नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम और उससे जुड़े प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।कानून के अनुसार 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है।1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि उसके माता या पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो।वहीं 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वालों के लिए नियम अधिक सख्त हैं। ऐसे मामलों में नागरिकता तभी मिलेगी जब दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों या उनमें से एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो।

पासपोर्ट सेवाओं का तेजी से विस्तार

पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय ने अपनी उपलब्धियों के आंकड़े भी साझा किए। मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 में लगभग 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें करीब 1.39 करोड़ पासपोर्ट जारी किए गए।सरकार का दावा है कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सरल हुई है। पुलिस सत्यापन की अवधि को छोड़कर सामान्य मामलों में पासपोर्ट छह कार्य दिवस के भीतर जारी किया जा रहा है।

देशभर में बढ़ा पासपोर्ट केंद्रों का नेटवर्क

पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्रों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां लगभग दस वर्ष पहले देश में केवल 77 पासपोर्ट केंद्र थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 545 हो गई है।सरकार के अनुसार इससे आम नागरिकों को राहत मिली है और सेवाओं की पहुंच दूरदराज क्षेत्रों तक बढ़ी है। पासपोर्ट केंद्रों पर औसत प्रतीक्षा समय भी घटकर 45 मिनट से कम रह गया है।

ई-पासपोर्ट को भी मिली रफ्तार

विदेश मंत्रालय ने चिप आधारित ई-पासपोर्ट के विस्तार को भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। सरकार का मानना है कि ई-पासपोर्ट से सुरक्षा बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया अधिक सुगम होगी।

नागरिकता का प्रमाण क्या माना जाता है

मंत्रालय की इस स्पष्टता के बाद नागरिकता के प्रमाण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय भी कह चुका है कि आधार कार्ड नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है। आधार मुख्य रूप से पहचान और कल्याणकारी योजनाओं के लिए उपयोग किया जाता है।इसी प्रकार मतदाता पहचान पत्र भी नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता। इसका उपयोग मतदान, पहचान और पते के सत्यापन के लिए किया जाता है। नागरिकता का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों, जन्म संबंधी रिकॉर्ड, माता-पिता की नागरिकता और अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। नागरिकता का अंतिम निर्णय नागरिकता कानून के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार ही होता है।