राजस्थान के अस्पतालों में मौत बांट रही दवा! सरकारी अस्पताल में नकली इंजेक्शन से बड़ा खुलासा..

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में महिलाओं को दी गई ब्लीडिंग रोकने वाली ऑक्सीटोसिन दवा नकली पाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में इस दवा की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। मामले के बाद सरकारी अस्पतालों में दवा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राजस्थान के अस्पतालों में मौत बांट रही दवा! सरकारी अस्पताल में नकली इंजेक्शन से बड़ा खुलासा..

दि राइजिंग न्यूज़ | कोटा | 27 मई 2026

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद पांच महिलाओं की मौत के मामले ने पूरे स्वास्थ्य विभाग को हिला कर रख दिया है। जांच में सामने आया है कि महिलाओं को प्रसव के दौरान दी गई ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की एक खेप नकली थी। यह वही दवा होती है जिसका इस्तेमाल डिलीवरी के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। इस खुलासे के बाद राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

इंजेक्शन में जरूरी सक्रिय तत्व ही नहीं मिला

राजस्थान औषधि नियंत्रण विभाग की प्रयोगशाला जांच में यह सामने आया कि जिस ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया, उसमें वह सक्रिय तत्व मौजूद ही नहीं था जो रक्तस्राव रोकने के लिए जरूरी माना जाता है। यानी महिलाओं को जो दवा दी जा रही थी, उसका असली असर ही मौजूद नहीं था। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण बन सकता है और ऐसी स्थिति में नकली या खराब दवा जानलेवा साबित हो सकती है।

पांच महिलाओं की मौत के बाद मचा हड़कंप

कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डिलीवरी के बाद लगातार पांच महिलाओं की मौत होने के बाद मामला गंभीर हुआ। शुरुआती जांच में पता चला कि मृत महिलाओं को इसी बैच का इंजेक्शन लगाया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों में भी डर का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर यदि नकली दवाइयां दी जाएंगी तो गरीब मरीज आखिर किस पर भरोसा करेंगे।

अमृतसर की कंपनी के इंजेक्शन जांच में फेल

राजस्थान के औषधि नियंत्रक अजय फाटक ने बताया कि अमृतसर स्थित एक दवा निर्माण कंपनी द्वारा तैयार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का नमूना प्रयोगशाला जांच में असफल पाया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कोटा अस्पताल से इस बैच का पूरा स्टॉक जब्त कर लिया। साथ ही पूरे राजस्थान में इस दवा की बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगा दी गई। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह दवा किन-किन अस्पतालों और मेडिकल सप्लाई चैनलों तक पहुंची थी।

राज्यभर में दवा दुकानों और अस्पतालों को निर्देश

जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों को निर्देश जारी किए हैं कि संबंधित बैच की दवा तुरंत हटाई जाए। अधिकारियों ने कहा है कि यदि किसी अस्पताल या दुकान में यह दवा पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने जिलों के अधिकारियों को भी अलर्ट मोड पर रहने के आदेश दिए हैं।

अस्पताल प्रशासन ने सीधे संबंध से किया इनकार

हालांकि कोटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अभी तक महिलाओं की मौत को सीधे नकली इंजेक्शन से जोड़ने से इनकार किया है। अस्पताल का कहना है कि मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति बनाई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इलाज के रिकॉर्ड और अन्य चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

पिछले दस दिनों में 11 दवाइयों के नमूने फेल

इस घटना ने राजस्थान में दवाइयों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की पोल खोल दी है। पिछले दस दिनों में राज्य में बिक रही ग्यारह दवाइयों के नमूने जांच में असफल पाए गए हैं। इनमें बुखार, एलर्जी, संक्रमण, दर्द निवारक और आपातकालीन इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां शामिल हैं। लगातार सामने आ रही खराब दवाइयों की खबरों ने मरीजों और डॉक्टरों दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

कई राज्यों की कंपनियां जांच के घेरे में

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार ये दवाइयां राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली और महाराष्ट्र की विभिन्न कंपनियों में बनाई जा रही थीं। अब विभाग इन कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी कंपनी की लापरवाही सामने आती है तो उसका लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।

स्थानीय स्तर पर खरीदी गई थी दवा

जांच में यह भी सामने आया है कि कोटा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ने यह दवा स्थानीय स्तर पर खरीदी थी। सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य में स्थानीय स्तर पर दवाइयों की खरीद के लिए कोई स्पष्ट मानक प्रक्रिया तय नहीं थी। अब सरकार ने इस मामले के बाद नई व्यवस्था बनाने और सख्त दिशा-निर्देश लागू करने के आदेश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो सके।

स्वास्थ्य विभाग का बयान, मौत की वजह पर अभी सस्पेंस

राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ऑक्सीटोसिन दवा जांच में नकली जरूर पाई गई है, लेकिन महिलाओं की मौत की असली वजह क्या थी, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा। विभाग के अनुसार यदि प्रसव के दौरान सामान्य प्रक्रिया से रक्तस्राव नहीं रुकता तो दूसरी दवाइयों का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए फिलहाल किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे मामले ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और दवा आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की नियमित और सख्त जांच बेहद जरूरी है। यदि नकली दवाइयां मरीजों तक पहुंचती रहीं तो यह लाखों लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। लोगों का कहना है कि सरकार को दवा कंपनियों और सप्लाई सिस्टम पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए ताकि मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ न हो।