शेयर बाजार में तूफानी तेजी, 76 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते, विदेशी निवेश में बढ़ोतरी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भी शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 76 हजार के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया।

शेयर बाजार में तूफानी तेजी, 76 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 16 जून 2026

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भी उत्साह और तेजी का माहौल देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में आई मजबूत खरीदारी के बाद आज भी निवेशकों ने बाजार पर भरोसा जताया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक ऊंचे स्तर पर कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने, विदेशी निवेश बढ़ने और आर्थिक सुधारों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने बाजार को मजबूती प्रदान की है।शुरुआती कारोबार में मुंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 262 अंकों की बढ़त के साथ 76,526 के स्तर पर खुला। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी भी 70 अंकों की मजबूती के साथ 23,924 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह अनुकूल बनी रहीं तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजार नए रिकॉर्ड स्तर छू सकता है।


अमेरिका-ईरान शांति समझौते से वैश्विक बाजारों में लौटा भरोसा

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा ने दुनिया भर के निवेशकों को राहत दी है। पिछले कई सप्ताह से जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब हालात सामान्य होने की उम्मीद से निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। इसका सीधा असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर देखने को मिल रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर बनी चिंताएं भी घटी हैं। निवेशकों को अब यह उम्मीद है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध जैसे हालात का खतरा कम होगा, जिससे पूंजी बाजारों में स्थिरता आएगी। यही कारण है कि भारतीय शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।


विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार को दिया सहारा

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हाल ही में किए गए नीतिगत बदलावों और कर संबंधी राहतों ने विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार द्वारा निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के बाद विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय वित्तीय बाजारों की ओर तेजी से बढ़ा है।विशेष रूप से सरकारी ऋण पत्रों और बड़े शेयरों में विदेशी निवेश बढ़ने से बाजार को मजबूती मिली है। वित्तीय जानकारों का कहना है कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर राजनीतिक माहौल और बेहतर निवेश अवसर विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यही कारण है कि बाजार में लगातार नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिल रहा है।


एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, फिर भी सकारात्मक संकेत

मंगलवार को एशियाई बाजारों में सतर्कता के साथ कारोबार शुरू हुआ। जापान का प्रमुख सूचकांक पिछले दिन की ऐतिहासिक तेजी के बाद मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। निवेशकों की निगाहें वहां की केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति पर टिकी हुई हैं, जिससे बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया।दूसरी ओर दक्षिण कोरिया के बाजार में शानदार तेजी दर्ज की गई, जबकि अन्य एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख काफी हद तक सकारात्मक बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव कम होने से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहतर माहौल तैयार हुआ है, जिसका लाभ भारतीय बाजार को भी मिल सकता है।


अमेरिकी बाजारों ने बनाया नया रिकॉर्ड

अमेरिकी शेयर बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने शांति समझौते की खबर का स्वागत किया और बड़े पैमाने पर खरीदारी की। प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों ने नए उच्च स्तरों को छूते हुए यह संकेत दिया कि वैश्विक निवेशक जोखिम लेने के लिए फिर से तैयार हो रहे हैं।अमेरिका के प्रमुख औद्योगिक, प्रौद्योगिकी और व्यापक बाजार सूचकांकों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। इससे यह संदेश गया कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में निवेशकों का भरोसा कायम है। भारतीय बाजारों के लिए भी यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है क्योंकि वैश्विक निवेश प्रवाह का असर घरेलू बाजारों पर सीधे तौर पर पड़ता है।


कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी, लेकिन राहत बरकरार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त देखने को मिली है। हालांकि कीमतें अभी भी उस स्तर से नीचे बनी हुई हैं जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाता है। इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को फिलहाल बड़ी राहत मिली हुई है। यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में अत्यधिक उछाल की संभावना कम होगी। इससे महंगाई नियंत्रण में रखने और आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिल सकती है। निवेशकों की नजर अब तेल बाजार की आगामी गतिविधियों और वैश्विक मांग पर बनी हुई है।


निवेशकों के लिए आगे क्या

बाजार की दिशा अब केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी फैसलों, विदेशी निवेश प्रवाह और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। यदि ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, बढ़ता निवेश और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार भारतीय शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले सावधानी बरतने और बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखने की सलाह दी जा रही है।