'हम सोनम वांगचुक के साथ हैं'... जंतर-मंतर पर छात्रों का बड़ा प्रदर्शन
सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्रों और समर्थकों ने प्रदर्शन करते हुए परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों पर कड़ी कार्रवाई और छात्रों की मांगों पर सरकार से तत्काल संवाद की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर बातचीत की प्रक्रिया तेज कर दी है। मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मिले, जबकि बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के बीच अहम बैठक प्रस्तावित है। सूत्रों के अनुसार छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और आंदोलन समाप्त करने के रास्ते पर विस्तार से बातचीत हो सकती है। ऐसे में सभी की निगाहें इस बैठक के नतीजे पर टिकी हुई हैं।
सोनम वांगचुक से देर रात मुलाकात के बाद सरकार और सीजेपी के बीच फिर शुरू हुई बातचीत, समाधान की बढ़ी उम्मीद
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम और उसके बाद बढ़े राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर आंदोलनकारियों से बातचीत की पहल की है। मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्रियों ने मेदांता अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक से मुलाकात की, जिसके बाद बुधवार को सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित की गई है।सूत्रों का कहना है कि सरकार अब आंदोलन का समाधान बातचीत के माध्यम से निकालने के पक्ष में है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों में लगातार संवाद की कोशिशें तेज हुई हैं। माना जा रहा है कि यदि इस बैठक में दोनों पक्ष किसी साझा सहमति पर पहुंचते हैं तो लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
मेदांता अस्पताल में देर रात क्या हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार मंगलवार देर रात केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल और बाद में मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार की ओर से यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान छात्र आंदोलन की वर्तमान स्थिति, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने के संभावित उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि आंदोलनकारियों की बात गंभीरता से सुनी जाएगी और समाधान निकालने की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे।
आज डॉ. जितेंद्र सिंह और सीजेपी नेताओं के बीच होगी अहम बैठक
बुधवार को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के बीच बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। इस कारण आज की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा होगी। सरकार यह समझने की कोशिश करेगी कि किन मुद्दों पर तत्काल निर्णय लिया जा सकता है और किन विषयों पर आगे विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता होगी। यदि दोनों पक्ष लचीला रुख अपनाते हैं तो लंबे समय से बना गतिरोध समाप्त होने की संभावना बढ़ सकती है।
संसद में चर्चा की मांग बनी सबसे बड़ा मुद्दा
सूत्रों के अनुसार देर रात हुई बातचीत में सबसे प्रमुख विषय छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा कराने की मांग रही। आंदोलनकारी लंबे समय से चाहते हैं कि परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा हो ताकि पूरे देश के सामने सरकार का पक्ष और छात्रों की चिंताएं रखी जा सकें।बताया जा रहा है कि सरकार इस मांग पर सकारात्मक विचार कर रही है। यदि संसद में इस विषय पर चर्चा होती है तो इसे आंदोलनकारियों की बड़ी सफलता माना जा सकता है। माना जा रहा है कि यही मुद्दा आगे की बातचीत को भी नई दिशा दे सकता है।
सरकार ने दोहराया- बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले हैं
केंद्र सरकार पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि वह आंदोलनकारियों के साथ संवाद के पक्ष में है। सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विवाद का समाधान बातचीत के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। इसी सोच के तहत लगातार संवाद की कोशिशें जारी रखी जा रही हैं।सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी सीजेपी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। उस बैठक में आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सरकार को सौंपा था। सरकार ने आश्वासन दिया था कि इन सभी मांगों पर शीर्ष स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
संसद मार्च के बाद और बढ़ी राजनीतिक हलचल
संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद यह पूरा मामला और अधिक राजनीतिक हो गया है। प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने के दौरान कई विपक्षी नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद संसद के भीतर और बाहर छात्र आंदोलन को लेकर बहस तेज हो गई।मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार छात्र आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग कर रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि वह संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। ऐसे में आज होने वाली बैठक को केवल छात्र आंदोलन ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं
आंदोलनकारी लगातार मांग कर रहे हैं कि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और पेपर लीक जैसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि बार-बार सामने आ रही अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इस पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।इसके अलावा आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक इन विषयों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आगे क्या हो सकता है
यदि बुधवार को होने वाली बैठक सकारात्मक माहौल में संपन्न होती है और दोनों पक्ष प्रमुख मुद्दों पर सहमति बना लेते हैं, तो लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। संसद में चर्चा और अन्य मांगों पर सरकार की सहमति आंदोलनकारियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।हालांकि यदि बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना भी बनी रहेगी। फिलहाल पूरे देश की निगाहें सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच होने वाली इस बैठक पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में इसी वार्ता के आधार पर यह तय होगा कि छात्र आंदोलन समाप्त होगा या फिर संघर्ष का अगला चरण शुरू होगा।