जस्टिस सूर्यकांत मामले में दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन!

सर्वोच्च न्यायालय में कथित हंगामा और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो विधि छात्रों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने, सुरक्षाकर्मियों से धक्का-मुक्की करने और अदालत की गरिमा भंग करने का आरोप है। दोनों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है और पुलिस घटना के पीछे की मंशा, बरामद आपत्तिजनक पर्चों तथा संभावित साजिश के हर पहलू की गहन जांच कर रही है।

जस्टिस सूर्यकांत मामले में दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 जुलाई 2026

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कथित हंगामा और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने दो विधि छात्रों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों पर न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने, सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने और अदालत की गरिमा भंग करने का आरोप है। पुलिस दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है और घटना के पीछे की पूरी सच्चाई जानने में जुटी हुई है।


सर्वोच्च न्यायालय में हंगामे के बाद दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सर्वोच्च न्यायालय में कथित हंगामे के मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अदालत की कार्यवाही के दौरान हुई इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो विधि छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों ने न केवल न्यायालय की कार्यवाही में बाधा डाली, बल्कि अदालत के भीतर अनुशासन और गरिमा को भी प्रभावित करने का प्रयास किया। घटना के तुरंत बाद न्यायालय प्रशासन की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।दिल्ली पुलिस का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है और यहां किसी भी प्रकार का अव्यवस्थित व्यवहार अत्यंत गंभीर माना जाता है। इसलिए इस मामले को सामान्य घटना की तरह नहीं देखा जा रहा है। जांच अधिकारी घटना से जुड़े हर तथ्य और प्रत्येक साक्ष्य का गहन विश्लेषण कर रहे हैं ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।


गिरफ्तार दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के निवासी, विधि के छात्र

पुलिस जांच में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रबल प्रताप सिंह और चंदर भान के रूप में हुई है। दोनों उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और विधि की पढ़ाई कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार घटना वाले दिन दोनों सर्वोच्च न्यायालय परिसर में मौजूद थे और सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष के भीतर पहुंचे थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उनका अदालत में प्रवेश किस उद्देश्य से हुआ था और क्या वे पहले से किसी योजना के तहत वहां पहुंचे थे।जांच एजेंसियां दोनों आरोपियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि, सामाजिक गतिविधियों, संपर्कों और हाल के दिनों में उनकी गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि इन जानकारियों से घटना के पीछे की मंशा को समझने में मदद मिल सकती है।


न्यायालय कक्ष संख्या तेरह में कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

दिल्ली पुलिस के अनुसार 10 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायालय कक्ष संख्या तेरह में एक मामले की नियमित सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान प्रबल प्रताप सिंह ने स्वयं को याचिकाकर्ता बताते हुए अदालत के समक्ष अपनी बात रखने का प्रयास किया। आरोप है कि कुछ ही देर बाद उसने अदालत में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, कागजात फेंके और न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया।अदालत में मौजूद लोगों के अनुसार इस घटना के कारण कुछ समय के लिए सुनवाई प्रभावित हुई और न्यायालय का वातावरण तनावपूर्ण हो गया। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और संबंधित अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी।


सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की के आरोप की भी जांच

पुलिस के अनुसार जब अदालत में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी को रोकने और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया तो उसने कथित रूप से ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस घटना के कारण कुछ समय के लिए न्यायालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।दिल्ली पुलिस ने बताया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार करने और न्यायालय की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न करने जैसे आरोपों की भी विस्तृत जांच की जा रही है। इस संबंध में न्यायालय में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।


मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण में क्या सामने आया

घटना के बाद सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी के आधार पर दोनों आरोपियों का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। यह परीक्षण विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में किया गया ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के समय उनकी मानसिक स्थिति सामान्य थी या नहीं। चिकित्सकों ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया कि दोनों को तत्काल किसी प्रकार के मानसिक उपचार की आवश्यकता नहीं है।पुलिस ने इस चिकित्सकीय रिपोर्ट को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि अब आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर की जाएगी।


आपत्तिजनक पर्चों की बरामदगी से जांच ने पकड़ी नई दिशा

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कुछ ऐसे पर्चे बरामद किए हैं जिनमें कथित रूप से आपत्तिजनक शब्द लिखे हुए थे। इन पर्चों को जब्त कर जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन पर्चों को किसने तैयार किया, उनका उद्देश्य क्या था और क्या इन्हें किसी विशेष योजना के तहत अदालत में लाया गया था।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या घटना केवल व्यक्तिगत विरोध का परिणाम थी या इसके पीछे किसी समूह अथवा सुनियोजित रणनीति की भूमिका थी। इस संबंध में कई पहलुओं की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी संभावित कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।


पुलिस रिमांड में आरोपियों से लगातार हो रही पूछताछ

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच अधिकारी लगातार उनसे पूछताछ कर रहे हैं और घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र तैयार किया जाएगा और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। फिलहाल पुलिस किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही है और मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।


न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद सर्वोच्च न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था और अदालतों में अनुशासन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में इस प्रकार की घटना सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता की ओर संकेत करती है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रबंधों को और अधिक मजबूत बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।फिलहाल दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। पूरे मामले पर अब न्यायालय और जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।