बागियों पर ममता का बड़ा एक्शन, टीएमसी के दो विधायक निष्कासित
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने विधायक संदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति और सार्वजनिक बयानबाजी के बीच हुई इस कार्रवाई को ममता बनर्जी के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी हार के बाद संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कवायद तेज हो गई है।
दि राइजिंग न्यूज़। कोलकाता। 02 जून 2026
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपनाते हुए दो विधायकों को निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा संगठन में अनुशासन बनाए रखने और बगावती सुरों पर लगाम लगाने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
टीएमसी ने दो विधायकों पर की कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस ने विधायक संदीपन साहा और रितब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठनात्मक फैसलों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व अब सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराने वाले नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने के मूड में है।
विधायकों की बैठक बनी विवाद की वजह
हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर पार्टी विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। हालांकि बड़ी संख्या में विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। बैठक में अनुपस्थित रहने वाले नेताओं में संदीपन साहा का नाम भी शामिल था। बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से बैठक को लेकर सवाल उठाए, जिससे पार्टी के भीतर असहमति और अधिक चर्चा में आ गई।
सार्वजनिक बयान के बाद बढ़ी नाराजगी
संदीपन साहा ने पार्टी नेतृत्व की ओर से बुलाई गई बैठक की आवश्यकता और कुछ संगठनात्मक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि संबंधित विषय पर पहले ही निर्णय लिया जा चुका था, ऐसे में दोबारा बैठक बुलाने के औचित्य को लेकर उनके मन में सवाल थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व को सार्वजनिक मंच से की गई इस टिप्पणी को अनुशासनहीनता के रूप में देखा गया, जिसके बाद कार्रवाई का रास्ता चुना गया।
पार्टी में बढ़ती असंतोष की आवाजें
टीएमसी के भीतर असंतोष केवल एक-दो नेताओं तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। पूर्व मंत्री और विधायक अरूप राय ने भी हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के रवैये को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं, लेकिन नेतृत्व की ओर से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा। उनके बयान ने भी पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को उजागर कर दिया है।
चुनावी हार के बाद संगठन पर दबाव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि इस समय संगठनात्मक एकजुटता सबसे बड़ी जरूरत है। ऐसे में किसी भी प्रकार की सार्वजनिक असहमति को नेतृत्व गंभीरता से ले रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि नेतृत्व संगठन को नए सिरे से व्यवस्थित करने में जुटा हुआ है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
दो विधायकों के निष्कासन के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतोष की निशानी बता रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम करार दे रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी आगे और किस रूप में सामने आती है।