टीएमसी में बगावत से बढ़ा सियासी संकट
पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस गंभीर राजनीतिक संकट से गुजर रही है। 58 विधायकों की बगावत के बाद अब 23 सांसदों के भी बागी गुट के संपर्क में होने की चर्चाएं तेज हैं। ममता बनर्जी ने कालीघाट में आपात बैठक बुलाकर अभिषेक बनर्जी पर फिर भरोसा जताया है, जबकि पार्टी बागी नेताओं के खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक रणनीति तैयार कर रही है।
दि राइजिंग न्यूज़। कोलकाता। 06 जून 2026
58 विधायकों के बाद 23 सांसदों के भी बागी गुट के संपर्क में होने की चर्चा, ममता ने बुलाई आपात बैठक
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। पहले 58 विधायकों की बगावत और अब 23 सांसदों के भी बागी गुट के संपर्क में होने की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे टीएमसी के इतिहास का सबसे बड़ा आंतरिक संकट माना जा रहा है। 15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज रहने के बाद चुनावी हार झेल चुकी ममता बनर्जी की पार्टी अब अपने अस्तित्व और संगठनात्मक एकता को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में टीएमसी को केवल 80 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन अब उन्हीं 80 विधायकों में से 58 विधायक बागी गुट के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।
ऋतब्रत बनर्जी बने बागी गुट का चेहरा
पार्टी से निष्कासित किए जा चुके संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी गुट लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया था, जिसे विधानसभा स्पीकर ने भी मान्यता दे दी। स्पीकर के इस फैसले ने टीएमसी नेतृत्व को बड़ा झटका दिया है। पार्टी का मानना है कि यह निर्णय नियमों के अनुरूप नहीं है और इसी कारण अब टीएमसी इस मामले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
23 सांसदों को लेकर बढ़ा सस्पेंस
विधायकों की बगावत के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा पार्टी के सांसदों को लेकर हो रही है। सूत्रों के अनुसार टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है तो पार्टी के लिए यह बेहद बड़ा राजनीतिक झटका होगा। लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। दल-बदल कानून से बचने के लिए किसी भी अलग गुट को कम से कम 19 सांसदों का समर्थन चाहिए होगा। ऐसे में 23 सांसदों के समर्थन की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। राज्यसभा में भी टीएमसी के 13 सदस्य हैं। यदि वहां अलग गुट बनता है तो उसे मान्यता के लिए कम से कम 9 सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा।
ऋतब्रत के बयान ने बढ़ाई अटकलें
शुक्रवार को कोलकाता में पत्रकारों ने ऋतब्रत बनर्जी से उन खबरों को लेकर सवाल किया जिनमें कुछ सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। इस पर ऋतब्रत ने कहा कि पिछले सात दिनों से उनकी किसी सांसद से बातचीत नहीं हुई है और वह नहीं कह सकते कि भविष्य में सांसद क्या फैसला लेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि "थोड़ा धैर्य रखिए, बहुत कुछ हो सकता है।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले कुछ दिन बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
अभिषेक बनर्जी पर फिर जताया भरोसा
बढ़ते संकट के बीच ममता बनर्जी ने अपने भतीजे और पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी पर एक बार फिर भरोसा जताया है। कालीघाट स्थित अपने आवास पर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में ममता ने अभिषेक को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त कर दिया। गौरतलब है कि बागी विधायकों का एक वर्ग अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को लेकर नाराज बताया जा रहा है। इसके बावजूद ममता ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी नेतृत्व में अभिषेक की भूमिका बरकरार रहेगी। ममता बनर्जी स्वयं पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनी रहेंगी।
सभी कमेटियां भंग कर किया पुनर्गठन
बगावत की घटनाओं के बाद टीएमसी ने बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए पार्टी की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया था। शुक्रवार को हुई बैठक में इन सभी इकाइयों का पुनर्गठन किया गया। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठन में नए बदलावों से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और आंतरिक असंतोष को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
कालीघाट में हुई अहम बैठक
ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर वरिष्ठ नेताओं की एक विशेष बैठक बुलाई। बैठक में अभिषेक बनर्जी, डोला सेन, चंद्रिमा भट्टाचार्य, बीना मंडल और राजीव बनर्जी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में संगठन की स्थिति, बागी विधायकों की गतिविधियों और संभावित राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की गई।
फिरहाद हकीम का इस्तीफा बना चर्चा का विषय
टीएमसी के वरिष्ठ नेता और कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह पहले की तरह जिम्मेदारियां नहीं निभा पा रहे थे और इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। फिरहाद हकीम ने नई सरकार और प्रशासन को जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की शुभकामनाएं भी दीं। राजनीतिक विश्लेषक उनके इस्तीफे को भी पार्टी के भीतर चल रही उथल-पुथल से जोड़कर देख रहे हैं।
ममता के सामने सबसे बड़ी चुनौती
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सांसदों और विधायकों की बगावत का सिलसिला आगे बढ़ता है तो ममता बनर्जी के सामने अपनी 28 वर्ष पुरानी पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और राजनीतिक पहचान को बचाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि टीएमसी नेतृत्व अभी भी स्थिति को नियंत्रित करने का दावा कर रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर जारी घटनाक्रमों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।