बिहार की शाही लीची पर उत्पादन और निर्यात का संकट

बिहार की प्रसिद्ध शाही लीची इस वर्ष दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर निर्यात के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी किसानों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक कोल्ड चेन, पैक हाउस और अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधाओं के अभाव में बिहार की लीची वैश्विक बाजार में अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पा रही है।

बिहार की शाही लीची पर उत्पादन और निर्यात का संकट

दि राइजिंग न्यूज़ | मुजफ्फरपुर | 9 जून 2026

बिहार की शाही लीची पर गहराया संकट

देश और दुनिया में अपनी मिठास तथा अनोखी खुशबू के लिए प्रसिद्ध बिहार की शाही लीची इस वर्ष कई चुनौतियों से जूझ रही है। राज्य में लीची उत्पादन में गिरावट और निर्यात से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने किसानों और कारोबारियों दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। बिहार में लगभग 32 हजार से 36 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती की जाती है। मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों की लीची देशभर में लोकप्रिय है और इसे भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी प्राप्त है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी पहुंच अपेक्षित स्तर तक नहीं बन पाई है।

उत्पादन में आई उल्लेखनीय गिरावट

इस वर्ष मौसम और अन्य कारणों के चलते लीची उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान लगाया जा रहा है। उत्पादन घटने से किसानों की आमदनी पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि पहले ही लागत लगातार बढ़ रही है और अब उत्पादन कम होने से मुनाफा और घट सकता है। कई बागान मालिकों का मानना है कि यदि उत्पादन और बाजार दोनों स्तरों पर उचित समर्थन नहीं मिला तो भविष्य में लीची खेती प्रभावित हो सकती है।

निर्यात सुविधाओं का अभाव बना बड़ी चुनौती

लीची उत्पादकों और निर्यातकों का कहना है कि बिहार में आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की निर्यात सुविधाओं का अभाव है। आधुनिक पैक हाउस, कोल्ड चेन नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय कार्गो टर्मिनल और तेज परिवहन व्यवस्था की कमी के कारण लीची को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बिहार लीची ग्रोवर्स एसोसिएशन के अनुसार बड़ी संख्या में किसानों को निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं की पर्याप्त जानकारी भी नहीं है। इसके कारण राज्य की बड़ी उत्पादन क्षमता होने के बावजूद किसान वैश्विक बाजार का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

पैक हाउस और कोल्ड चेन की कमी

 लीची अत्यंत नाजुक फल है और इसकी शेल्फ लाइफ सीमित होती है। ऐसे में आधुनिक पैकिंग, तापमान नियंत्रित भंडारण और तेज परिवहन अत्यंत आवश्यक हैं। पटना के बिहटा में स्थापित पैक हाउस से उम्मीदें थीं, लेकिन वह अभी तक पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पाया है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि राज्य में कई आधुनिक पैक हाउस विकसित किए जाने की आवश्यकता है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पैकिंग और निर्यात किया जा सके।

दिल्ली के जरिए हो रहा निर्यात

निर्यात कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार बिहार से सीधे विदेशी बाजारों तक लीची भेजने की व्यवस्था अभी पर्याप्त नहीं है। अधिकांश निर्यातक पहले लीची को रेफ्रिजरेटेड वाहनों के माध्यम से दिल्ली पहुंचाते हैं और वहां से हवाई मार्ग द्वारा यूरोप तथा अन्य देशों में भेजते हैं। इस प्रक्रिया में समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं। परिवहन में लगने वाले अतिरिक्त समय के कारण फल की गुणवत्ता पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यदि बिहार में अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधा और सीधी विदेशी उड़ानें उपलब्ध हों तो निर्यातक कम लागत में अधिक मात्रा में ताजा लीची विदेश भेज सकते हैं।

अनुसंधान केंद्र कर रहा नई पहल

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र भी लीची निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहा है। केंद्र के वैज्ञानिकों ने ऐसी विशेष पैकेजिंग तकनीक विकसित की है जिससे लीची की गुणवत्ता लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है। नई तकनीक की मदद से फल की शेल्फ लाइफ चार से पांच दिन तक बढ़ाई जा सकती है, जिससे विदेशी बाजारों तक बेहतर गुणवत्ता वाली लीची पहुंचाना आसान हो सकता है। केंद्र द्वारा इस वर्ष दुबई सहित अन्य बाजारों में लीची भेजने की तैयारी भी की जा रही है।

लगातार घट रहा निर्यात

एपीडा के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में लीची निर्यात और उससे होने वाले कारोबार में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

वर्ष 2023-24 में 550.37 मीट्रिक टन लीची का निर्यात हुआ था, जिससे लगभग 1.90 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।

वर्ष 2024-25 में निर्यात घटकर 448.25 मीट्रिक टन रह गया और कारोबार लगभग 1.83 करोड़ रुपये तक सीमित रहा।

वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा और घटकर 353.87 मीट्रिक टन पर पहुंच गया, जबकि कुल कारोबार लगभग 1.40 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि निर्यात में लगातार गिरावट आ रही है, जो राज्य के कृषि क्षेत्र और किसानों दोनों के लिए चिंता का विषय है।

बिहार में आधुनिक कोल्ड चेन नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय कार्गो सेवाएं, उन्नत पैक हाउस और किसानों के लिए निर्यात प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं तो शाही लीची की वैश्विक मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।  बिहार की लीची गुणवत्ता, स्वाद और पहचान के मामले में दुनिया के कई बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखती है। आवश्यकता केवल बेहतर बुनियादी ढांचे और संगठित निर्यात नीति की है। राज्य के किसान और कारोबारी अब सरकार से ऐसी सुविधाएं विकसित करने की मांग कर रहे हैं ताकि बिहार की शाही लीची अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सके और किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सके।