उद्धव गुट पर टूट का सियासी संकट

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) के सामने नया संकट खड़ा होता दिख रहा है। पार्टी के कई सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं। दलबदल की अटकलों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है।

उद्धव गुट पर टूट का सियासी संकट

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 17 जून 2026

उद्धव ठाकरे के सामने नई चुनौती

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) के सामने राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के कई सांसदों के बगावती रुख अपनाने की अटकलों ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कुछ सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

सांसदों की बैठक से बढ़ी चर्चाएं

हाल ही में उद्धव ठाकरे ने अपने आवास मातोश्री में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। हालांकि इस बैठक में सभी सांसद शामिल नहीं हुए, जिसके बाद राजनीतिक अटकलों का दौर तेज हो गया। अनुपस्थित सांसदों को लेकर विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने कई तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए। बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व ने दावा किया कि सभी सांसद संगठन के साथ हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही खबरों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

शिंदे गुट के दावों से बढ़ा सस्पेंस

शिंदे गुट के कई नेताओं ने दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद उनके संपर्क में हैं। कुछ नेताओं ने यहां तक कहा है कि आगामी मॉनसून सत्र से पहले कई सांसद शिंदे गुट का दामन थाम सकते हैं। इन दावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से दल बदलने की घोषणा नहीं की है।

डैमेज कंट्रोल में जुटा नेतृत्व

संभावित टूट की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे सक्रिय हो गए हैं। पार्टी नेतृत्व कथित तौर पर उन सांसदों से लगातार संपर्क बनाए हुए है जिनके बारे में असंतोष या नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी का प्रयास है कि किसी भी तरह संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखी जाए और संभावित नुकसान को रोका जा सके।

संजय राउत ने किया दावा

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने दावा किया है कि पार्टी के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने विपक्षी दावों को राजनीतिक अफवाह करार देते हुए कहा कि संगठन पूरी तरह एकजुट है। राउत ने यह भी कहा कि पार्टी आने वाले समय में अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत जवाबी कदम उठाएगी।

दलबदल कानून पर टिकी नजर

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यदि किसी संसदीय दल में विभाजन होता है तो दलबदल कानून के प्रावधान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की संख्या को देखते हुए किसी भी संभावित टूट के लिए आवश्यक संख्या का सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी वजह से राजनीतिक पर्यवेक्षक सांसदों की गतिविधियों और बैठकों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

मॉनसून सत्र से पहले बढ़ सकती है हलचल

राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है। फिलहाल सभी पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन अंतिम तस्वीर आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगी। उद्धव ठाकरे के लिए यह स्थिति एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी पहले भी बड़े संगठनात्मक विभाजन का सामना कर चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिवसेना (यूबीटी) अपने सांसदों को एकजुट रखने में कितनी सफल होती है।