अमेरिकी संसद में ट्रंप को बड़ा झटका, ईरान युद्ध रोकने वाला प्रस्ताव पास

अमेरिकी संसद के निचले सदन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाले वॉर पावर्स प्रस्ताव को 215-208 मतों से मंजूरी दे दी है। चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेटिक सांसदों का समर्थन किया। प्रस्ताव अभी सीनेट में जाएगा और उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर या संभावित वीटो की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस घटनाक्रम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

अमेरिकी संसद में ट्रंप को बड़ा झटका, ईरान युद्ध रोकने वाला प्रस्ताव पास

दि राइजिंग न्यूज़। वॉशिंगटन। 05 जून 2026

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही संसद में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने और युद्ध संबंधी फैसलों पर कांग्रेस की भूमिका सुनिश्चित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के पक्ष में 215 जबकि विरोध में 208 वोट पड़े। खास बात यह रही कि रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने भी डेमोक्रेटिक सांसदों का साथ दिया।  यह प्रस्ताव तथाकथित वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन के तहत लाया गया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रखने से रोकना है। प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक सांसदों ने आगे बढ़ाया था, लेकिन इसे द्विदलीय समर्थन मिलने से ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक संदेश और भी मजबूत हो गया है।

चार रिपब्लिकन सांसदों ने बदला रुख

मतदान के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अपनी पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग जाकर प्रस्ताव के समर्थन में वोट दिया। इन सांसदों के समर्थन ने प्रस्ताव को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप की पार्टी का दोनों सदनों में प्रभाव बना हुआ है।  राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष, बढ़ती आर्थिक चिंताओं और युद्ध को लेकर जनता के बीच बढ़ रही बेचैनी का असर अब अमेरिकी राजनीति में भी दिखाई देने लगा है।

पहले कई बार विफल हो चुकी थी कोशिश

ईरान युद्ध को सीमित करने के लिए इससे पहले भी कई बार ऐसे प्रस्ताव लाए गए थे, लेकिन वे पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा सके थे। इस बार पहली बार हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्रस्ताव पारित होने में सफलता मिली है, जिसे ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।  रिपोर्टों के अनुसार, दो सप्ताह पहले भी इस प्रस्ताव पर मतदान की संभावना बनी थी, लेकिन पर्याप्त समर्थन मिलने की आशंका को देखते हुए मतदान टाल दिया गया था। इस बार विपक्ष और कुछ रिपब्लिकन सांसदों की एकजुटता ने तस्वीर बदल दी।

अभी सीनेट की मंजूरी बाकी

हालांकि हाउस में प्रस्ताव पारित हो गया है, लेकिन इसे कानूनी रूप से प्रभावी बनने के लिए अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट से भी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद भी यदि राष्ट्रपति ट्रंप इस पर वीटो का इस्तेमाल करते हैं तो कांग्रेस को दो-तिहाई बहुमत जुटाना पड़ेगा, जो फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा।  भले ही यह प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से युद्ध नहीं रोकता हो, लेकिन यह स्पष्ट संकेत देता है कि कांग्रेस के भीतर ट्रंप की ईरान नीति को लेकर असहमति बढ़ रही है।

ट्रंप की विदेश नीति पर उठे सवाल

हाउस में हुई इस वोटिंग को ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और उसके आर्थिक प्रभावों को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच चिंता बढ़ी है। अब यह मामला केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि अमेरिकी घरेलू राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।