डील करो या अंजाम भुगतो, रक्षा मंत्री का सख्त संदेश: ईरान को अमेरिका की दो टूक चेतावनी
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि या तो समझौता किया जाए या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहा जाए। बंदर अब्बास पर अमेरिकी कार्रवाई और कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद तनाव बढ़ गया है। वहीं दोनों देशों के बीच संभावित समझौते को लेकर भी बातचीत जारी है।
दि राइजिंग न्यूज़। वॉशिंगटन। 30 मई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के पास अब केवल दो विकल्प हैं, या तो समझौता करे या फिर गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहे। हालिया घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर टिकी हुई हैं।
बंदर अब्बास पर अमेरिकी हमला
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र के पास ईरानी ड्रोन ऑपरेशन को निशाना बनाकर हमला किया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई।
ईरान ने भी किया पलटवार
अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हालांकि कुवैत की एयर डिफेंस प्रणाली ने मिसाइल को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई।
रक्षा मंत्री की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बयान देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को कूटनीतिक रास्ता अपनाकर समझौता करना चाहिए, अन्यथा उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस बयान को अमेरिका की ओर से अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है।
समझौते की उम्मीद अभी बाकी
रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच 60 दिनों के एक संभावित समझौता मसौदे पर चर्चा हुई है। यदि यह समझौता लागू होता है तो ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करने का आश्वासन देगा और दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर आगे बातचीत करेंगे।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य भी चर्चा में
संभावित समझौते के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को सामान्य करने पर भी विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि ईरान को समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी में कुछ राहत देने पर विचार कर सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच संभावित समझौते की चर्चा उम्मीद की किरण दिखा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जारी सैन्य कार्रवाई यह संकेत देती है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य होने से दूर हैं।