क्या 2075 में इस्लाम होगा दुनिया का सबसे बड़ा धर्म
वैश्विक धार्मिक अध्ययन रिपोर्ट 2026 के अनुसार दुनिया की धार्मिक जनसंख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुस्लिम आबादी सबसे तेज़ गति से बढ़ने का अनुमान है, जबकि ईसाई धर्म अभी भी सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय बना रह सकता है। हिंदू आबादी का मुख्य केंद्र भारत और एशिया ही रहेगा, हालांकि वर्ष 2075 के लिए इसका कोई निश्चित वैश्विक अनुमान उपलब्ध नहीं है।
दि राइजिंग न्यूज़ | मैसाचुसेट्स | 26 जून 2026
दुनिया की धार्मिक संरचना आने वाले दशकों में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। वर्ष 2026 में जारी एक वैश्विक धार्मिक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार जनसंख्या वृद्धि, युवाओं की अधिक संख्या और एशिया तथा अफ्रीका में बढ़ती आबादी के कारण इस्लाम सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला धर्म बन सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो वर्ष 2075 तक दुनिया की धार्मिक तस्वीर पहले की तुलना में काफी अलग दिखाई दे सकती है। हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इस सदी के मध्य तक ईसाई धर्म दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बना रहने की संभावना है।
वैश्विक अध्ययन में किन आधारों पर तैयार किए गए अनुमान
यह अध्ययन विश्व स्तर पर उपलब्ध जनसंख्या संबंधी आंकड़ों, विभिन्न देशों के सर्वेक्षणों और अनेक शैक्षणिक संस्थानों के शोध के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या अनुमान सहित कई अंतरराष्ट्रीय स्रोतों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का उद्देश्य वर्ष 2075 तक दुनिया की संभावित धार्मिक जनसंख्या का अनुमान प्रस्तुत करना है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह भविष्य का संभावित आकलन है, अंतिम या निश्चित आंकड़ा नहीं।
सबसे तेज़ गति से बढ़ रही है मुस्लिम आबादी
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान समय में दुनिया की मुस्लिम आबादी दो अरब से अधिक हो चुकी है। अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि यदि मौजूदा वृद्धि दर बनी रहती है तो आने वाले वर्षों में मुस्लिम आबादी में लगातार वृद्धि होगी। रिपोर्ट के अनुसार इस्लाम की वार्षिक वृद्धि दर लगभग एक दशमलव पांच सात प्रतिशत आंकी गई है, जो अन्य प्रमुख धर्मों की तुलना में अधिक है। इसी कारण भविष्य में मुस्लिम आबादी का वैश्विक अनुपात लगातार बढ़ने की संभावना जताई गई है।
ईसाई धर्म अभी भी सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय
तेज़ वृद्धि के बावजूद अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ईसाई धर्म निकट भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय बना रहेगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2075 तक ईसाई आबादी लगभग दो अरब सड़सठ करोड़ तक पहुंच सकती है। वहीं मुस्लिम आबादी भी लगातार बढ़ते हुए दो अरब से अधिक रहने का अनुमान है। इसका अर्थ यह है कि दोनों धर्मों के बीच संख्या का अंतर पहले की तुलना में काफी कम हो सकता है।
बदल रहा है ईसाई धर्म का वैश्विक केंद्र
रिपोर्ट के अनुसार ईसाई धर्म समाप्त नहीं हो रहा बल्कि उसका भौगोलिक केंद्र बदल रहा है। पहले जहां यूरोप ईसाई धर्म का प्रमुख केंद्र माना जाता था, वहीं अब अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में ईसाई आबादी तेजी से बढ़ रही है। दूसरी ओर यूरोप के कई देशों में चर्चों की संख्या और धार्मिक भागीदारी में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। इससे विश्व स्तर पर ईसाई धर्म का केंद्र नए क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित होता दिखाई दे रहा है।
मध्य पूर्व में लगातार घट रही है ईसाई आबादी
रिपोर्ट में मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में इस क्षेत्र की कुल आबादी में ईसाइयों की हिस्सेदारी काफी अधिक थी, लेकिन अब इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे युद्ध, पलायन, आर्थिक संकट, सामाजिक अस्थिरता और लंबे समय से जारी संघर्ष जैसे कारण बताए गए हैं। इन परिस्थितियों ने कई पुराने ईसाई समुदायों की जनसंख्या को प्रभावित किया है।
हिंदू आबादी को लेकर क्या कहती है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की लगभग पूरी हिंदू आबादी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में निवास करती है और उसका सबसे बड़ा हिस्सा भारत में रहता है। भारत, नेपाल और मॉरीशस ऐसे देश हैं जहां हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय हैं। अध्ययन में वर्ष 2075 तक हिंदू आबादी का स्पष्ट अनुमान उपलब्ध नहीं कराया गया है। हालांकि पहले के शोधों के अनुसार वर्ष 2010 से 2020 के बीच वैश्विक स्तर पर हिंदू आबादी में लगभग बारह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जबकि कुछ अध्ययनों में वर्ष 2055 से 2060 के बीच वृद्धि की गति धीमी पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है।
भविष्य की धार्मिक तस्वीर क्यों बदल सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी धर्म की जनसंख्या केवल जन्म दर से तय नहीं होती। शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रवास, सामाजिक परिस्थितियां, आर्थिक विकास और आयु संरचना जैसे कई कारक धार्मिक जनसंख्या को प्रभावित करते हैं। इसलिए भविष्य के सभी अनुमान मौजूदा रुझानों पर आधारित होते हैं और समय के साथ इनमें परिवर्तन संभव है। इसी कारण वर्ष 2075 की वास्तविक तस्वीर आज किए गए अनुमानों से अलग भी हो सकती है।