खून बहा, अब पानी नहीं बहेगा

दि राइजिंग न्यूज। 23 अप्रैल 2025 ।  नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक में साल 1960 में हुए ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया गया। यह फैसला न सिर्फ पाकिस्तान के लिए गहरी चोट है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक और जल कूटनीति का बड़ा मोड़ भी है।

खून बहा, अब  पानी नहीं बहेगा

दि राइजिंग न्यूज। 23 अप्रैल 2025 । 

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक में साल 1960 में हुए ऐतिहासिक सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया गया। यह फैसला न सिर्फ पाकिस्तान के लिए गहरी चोट है, बल्कि यह भारत की रणनीतिक और जल कूटनीति का बड़ा मोड़ भी है।

क्यों अहम है सिंधु जल संधि?

1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत:

  • भारत को पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का अधिकार मिला,

  • जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) से 80 फीसदी से अधिक पानी मिलने का अधिकार मिला।

भारत के हिस्से का अधिकांश पानी भी पाकिस्तान को चला जाता है क्योंकि भारत ने इसका उपयोग सीमित रखा।

भारत का बदला रुख: सिंधु पर नियंत्रण

CCS की बैठक में भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के साथ-साथ पाकिस्तान में भारतीय दूतावास बंद करने, ऑटारी बॉर्डर को बंद करने और पाकिस्तानी राजनयिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तानियों को अब भारतीय वीजा नहीं मिलेगा।

क्या होगा पाकिस्तान में असर?

  1. खेती पर असर: पाकिस्तान की 80% कृषि भूमि सिंधु जल प्रणाली पर निर्भर है। सिंधु जल के बिना सिंचाई असंभव होगी।

  2. शहरी जल संकट: कराची, लाहौर, मुल्तान जैसे शहरों की जलापूर्ति ठप हो सकती है।

  3. पावर प्रोजेक्ट्स ठप: तरबेला और मंगला जैसे जल विद्युत परियोजनाओं को बड़ा झटका लग सकता है।

  4. खाद्य सुरक्षा खतरे में: 237 मिलियन लोगों का जीवन यापन प्रभावित हो सकता है।

  5. अशांति की आशंका: पानी की किल्लत से पाकिस्तान में व्यापक अस्थिरता फैल सकती है।

ऐतिहासिक भूल की भरपाई?

जल विशेषज्ञ लंबे समय से सिंधु संधि को भारत के लिए नुकसानदायक मानते रहे हैं। उनका तर्क रहा है कि यह एकतरफा समझौता था जिसे समय के साथ संशोधित करना चाहिए था। "खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते," इस सिद्धांत पर भारत सरकार ने कड़ा संदेश दिया है।

पड़ोसी देश में हलचल तेज

भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान के भीतर हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आंतरिक स्थिरता के लिए घातक मान रहे हैं। पाकिस्तान सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।

निष्कर्ष

पहलगाम में भारतीय नागरिकों पर हुए आतंकवादी हमले ने भारत को सिर्फ सैन्य नहीं, जल नीति के मोर्चे पर भी निर्णायक बनने के लिए मजबूर कर दिया है। सिंधु जल संधि को स्थगित कर भारत ने न केवल पाकिस्तान को चेतावनी दी है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि आतंक के साथ किसी भी स्तर पर सहिष्णुता अब नहीं बरती जाएगी।