इस बार धरती को भट्टी बना सकता है ‘सुपर अल नीनो’, दुनिया के कई देशों में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा

इस साल भारत में ‘सुपर अल नीनो’ की आशंका जताई जा रही है, जिससे भीषण गर्मी, लंबी हीटवेव और कमजोर मानसून का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से हालात और गंभीर हो सकते हैं।

इस बार धरती को भट्टी बना सकता है ‘सुपर अल नीनो’, दुनिया के कई देशों में भीषण गर्मी और सूखे का खतरा

दि राइजिंग न्यूज | नई दिल्ली | 21 मई 2026

देशभर में इस साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। मौसम विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार सामान्य अल नीनो नहीं बल्कि ‘सुपर अल नीनो’ जैसी खतरनाक स्थिति बन सकती है। अगर ऐसा होता है तो भारत में भीषण गर्मी, लंबी हीटवेव और कमजोर मानसून जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से इस बार स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर हो सकती है और कई पुराने तापमान रिकॉर्ड टूट सकते हैं।

क्या होता है अल नीनो और क्यों बढ़ती है चिंता

अल नीनो प्रशांत महासागर में होने वाला एक बड़ा मौसमी बदलाव है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में महासागर का गर्म पानी एशिया की ओर रहता है, लेकिन जब समुद्र की हवाएं कमजोर पड़ती हैं तो यही गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की ओर लौटने लगता है। इसके कारण मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी बदलाव की वजह से भारत में बारिश कम हो जाती है और गर्मी तेजी से बढ़ती है।

भारत में क्यों पड़ती है भीषण गर्मी

भारत में मानसून अरब सागर और हिंद महासागर से आने वाली नम हवाओं पर निर्भर करता है। लेकिन अल नीनो के दौरान यह हवाएं कमजोर हो जाती हैं या उनकी दिशा बदल जाती है। इससे बादल कम बनते हैं और बारिश घट जाती है। जब आसमान साफ रहता है तो सूरज की तेज किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में गर्मी खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है।

इस बार क्यों ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है ‘सुपर अल नीनो’

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से काफी तेजी से बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि महासागर के अंदर बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो चुका है। जब समुद्र का तापमान सामान्य से दो डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो इस बार भारत में भीषण हीटवेव और कमजोर मानसून का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।

पहले भी दिख चुका है इसका खतरनाक असर

इतिहास में बहुत कम बार सुपर अल नीनो जैसी स्थिति देखने को मिली है। साल 1982, 1997 और 2015 में इसके गंभीर प्रभाव दर्ज किए गए थे। वहीं 2023 में भी मजबूत अल नीनो की वजह से भारत के कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। उस दौरान कई राज्यों में बारिश कम हुई और लंबे समय तक लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा था।

ग्लोबल वॉर्मिंग ने बढ़ाया खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी पहले ही ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से तेजी से गर्म हो रही है। ऐसे में अगर सुपर अल नीनो सक्रिय होता है तो उसका असर और ज्यादा खतरनाक हो सकता है। समुद्र के अंदर जमा गर्म पानी वातावरण को और ज्यादा गर्म करेगा, जिससे तापमान में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस तरह की मौसमी घटनाएं और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती हैं।

देश में बढ़ेगी भीषण गर्मी

अगर इस साल सुपर अल नीनो पूरी तरह सक्रिय होता है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। इससे खेती-किसानी पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है और जल संकट भी गहरा सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने और गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

मौसम विभाग और सरकार की बढ़ी चिंता

देश में लगातार बढ़ते तापमान को देखते हुए मौसम विभाग और सरकार भी सतर्क हो गई है। कई राज्यों में पहले से ही गर्मी को लेकर अलर्ट जारी किया जा चुका है। अस्पतालों को भी हीटवेव से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए तैयार रहने को कहा गया है। प्रशासन लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने और ज्यादा पानी पीने की सलाह दे रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।