ईरान ने भारत पर जताया भरोसा, पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, कहा- शांति के लिए भारत जो करेगा उसका स्वागत होगा

ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने भारत की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में शांति के लिए भारत जो भी पहल करेगा, ईरान उसका स्वागत करेगा। इस बयान को पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

ईरान ने भारत पर जताया भरोसा, पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, कहा- शांति के लिए भारत जो करेगा उसका स्वागत होगा

दि राइजिंग न्यूज |  14 मई 2026

पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच ईरान ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने भारत पहुंचते ही ऐसी बातें कहीं, जिन्हें पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में शांति कायम करने के लिए भारत जैसी बड़ी शक्ति जो भी पहल करेगी, तेहरान उसका पूरी मजबूती से स्वागत करेगा ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी इन दिनों नई दिल्ली दौरे पर हैं। उन्होंने राजधानी में चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारत की विदेश नीति, ब्रिक्स में उसकी भूमिका और पश्चिम एशिया संकट को लेकर खुलकर अपने विचार रखे। उनके बयान से साफ संकेत मिला कि मौजूदा हालात में ईरान भारत को एक भरोसेमंद और संतुलित साझेदार के रूप में देख रहा है।

भारत की तारीफ करते हुए क्या बोले ईरानी नेता

काजिम गरीबाबादी ने कहा कि भारत हमेशा से शांति और स्थिरता का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हर वैश्विक मंच पर संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाई है। ईरान का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी शांति कायम करने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है।उन्होंने कहा, “भारत इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थक है। भारत जो भी सकारात्मक और शांतिपूर्ण पहल करेगा, ईरान उसका स्वागत करेगा।”ईरान के इस बयान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन ईरान ने भारत की खुलकर सराहना कर यह संकेत दे दिया कि वह नई दिल्ली को ज्यादा भरोसेमंद मानता है।

ब्रिक्स बैठक से पहले बढ़ी हलचल

ईरानी उप विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ब्रिक्स देशों की महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, वैश्विक आर्थिक संकट, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने वाली है।ईरान ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की जमकर तारीफ की। गरीबाबादी ने कहा कि भारत ने बेहद निष्पक्ष और संतुलित रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि दुनिया को यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि ब्रिक्स समूह अंदर से बंटा हुआ है।

संयुक्त अरब अमीरात पर साधा निशाना

बातचीत के दौरान काजिम गरीबाबादी ने बिना नाम लिए संयुक्त अरब अमीरात पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का एक सदस्य देश लगातार ईरान की निंदा करने की मांग कर रहा था, जिसकी वजह से समूह पश्चिम एशिया संकट पर एकमत नहीं हो पाया।उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी अपने पड़ोसी देशों पर हमला नहीं किया। बल्कि कुछ देशों ने अपने इलाके अमेरिका को इस्तेमाल करने दिए ताकि ईरान पर सैन्य दबाव बनाया जा सके। इसके बावजूद ईरान ने कभी उन देशों की निंदा की मांग नहीं की।ईरान के इस बयान को खाड़ी देशों और अमेरिका के लिए भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्या बोला ईरान

जब पत्रकारों ने अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा तो गरीबाबादी ने बेहद सावधानी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान केवल एक मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है और ईरान हर उस प्रयास का स्वागत करेगा जो कूटनीतिक समाधान और शांति की दिशा में हो। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान ने भारत को प्राथमिकता देकर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि क्षेत्रीय मामलों में नई दिल्ली की भूमिका ज्यादा प्रभावशाली मानी जा रही है।

चाबहार बंदरगाह पर दोहराई प्रतिबद्धता

ईरान ने भारत के साथ मिलकर विकसित किए जा रहे चाबहार बंदरगाह को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। गरीबाबादी ने कहा कि यह परियोजना दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद अहम है।उन्होंने कहा कि अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद ईरान इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में भारत को तय करना होगा कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच किस तरह आगे बढ़ता है। चाबहार बंदरगाह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बना सकता है, जबकि पाकिस्तान को दरकिनार किया जा सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान

ईरान के उप विदेश मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति समाप्त करता है, बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है और जब्त की गई ईरानी संपत्तियां वापस करता है तो तेहरान जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर विचार कर सकता है।उन्होंने दावा किया कि ईरान ने कई भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया है और आगे भी भारत के साथ सहयोग जारी रहेगा।गरीबाबादी ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए तो उसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत

ईरान के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी भारत को एक भरोसेमंद, संतुलित और जिम्मेदार शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी खासियत यही मानी जा रही है कि उसने अमेरिका, रूस, ईरान और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। यही वजह है कि संकट की स्थिति में भी कई देश भारत को भरोसेमंद साझेदार मान रहे हैं।

पाकिस्तान के लिए क्यों अहम है यह बयान

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार ईरान का यह बयान पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका है। पाकिस्तान लंबे समय से खुद को इस्लामी देशों के बड़े नेता के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है, लेकिन ईरान ने खुले तौर पर भारत की सराहना कर उसकी रणनीति को कमजोर कर दिया है। इससे यह भी साफ हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है जबकि पाकिस्तान की भूमिका सीमित होती जा रही है।

पश्चिम एशिया संकट में भारत की भूमिका बढ़ने के संकेत

ईरान के ताजा बयान से यह संकेत भी मिल रहे हैं कि आने वाले समय में भारत पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत की तटस्थ विदेश नीति और सभी पक्षों के साथ अच्छे संबंध उसे एक मजबूत मध्यस्थ बना सकते हैं।अब सबकी नजरें ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक पर टिकी हैं, जहां पश्चिम एशिया संकट को लेकर बड़ा साझा बयान सामने आ सकता है।