अभिजीत दीपके ने भी मांगा अमित शाह का इस्तीफा, छात्र आंदोलन पर घमासान
छात्र आंदोलन पर कथित बल प्रयोग को लेकर अभिजीत दीपके ने राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए अमित शाह के इस्तीफे की मांग की और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 31 जुलाई 2026
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने छात्र आंदोलन के दौरान हुए कथित बल प्रयोग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों पर की गई कार्रवाई के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। दीपके ने लोकतांत्रिक संस्थाओं, जांच एजेंसियों और शासन व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग हुई तेज
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दौरान जिस प्रकार बल प्रयोग की घटनाएं सामने आईं, उससे देशभर में चिंता का माहौल बना है। दीपके का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार नहीं होना चाहिए था। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।अभिजीत दीपके ने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई को केवल प्रशासनिक निर्णय बताकर नहीं टाला जा सकता। उनके अनुसार इतने बड़े स्तर की कार्रवाई के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने अमित शाह के इस्तीफे की मांग को उचित बताया।
छात्र आंदोलन पर उठाए सवाल
दीपके ने कहा कि बीस जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ जिस प्रकार कार्रवाई हुई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से उठा रहे थे, लेकिन उनके साथ सख्ती बरती गई। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को महत्व दिया जाना चाहिए।उन्होंने दावा किया कि छात्रों के मन में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर पहले से असंतोष था। ऐसे में आंदोलन को दबाने की कोशिश स्थिति को और गंभीर बना सकती है। दीपके ने कहा कि सरकार को छात्रों के मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से करना चाहिए था। बल प्रयोग जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं मानी जा सकतीं।
लोकतंत्र और संस्थाओं को लेकर चिंता व्यक्त
अभिजीत दीपके ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने न्यायपालिका, जांच एजेंसियों और अन्य संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन संस्थाओं की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास बना रहना चाहिए। लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब संस्थाएं स्वतंत्र और जवाबदेह हों।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल विपक्षी दलों की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए आम नागरिकों को भी जागरूक रहना होगा। दीपके के अनुसार देश के भविष्य के लिए यह आवश्यक है कि लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत किया जाए। उन्होंने जनता से भी इस विषय पर एकजुट रहने की अपील की।
बाहरी सहायता के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया
छात्र आंदोलन और कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर लगाए जा रहे बाहरी सहायता के आरोपों पर भी अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में ऐसी कोई स्थिति है तो इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसी गतिविधियां हो रही थीं तो संबंधित एजेंसियां पहले से सक्रिय क्यों नहीं हुईं।दीपके का कहना है कि किसी भी आरोप को केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यदि कोई तथ्य सामने आता है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं। इसी आधार पर सभी पक्षों को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था और नए शिक्षा मंत्री पर टिप्पणी
अभिजीत दीपके ने हाल ही में नियुक्त किए गए नए शिक्षा मंत्री को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के युवाओं को बेहतर अवसर और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। उनके अनुसार शिक्षा क्षेत्र में सुधार समय की सबसे बड़ी मांग है। छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों को राजनीतिक विवादों से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को दूर करना भी उतना ही आवश्यक है। तभी शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जा सकेगा।
छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में देशभर के छात्रों और युवाओं ने परीक्षा अनियमितताओं, प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि प्रभावित छात्रों को न्याय मिले और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इस आंदोलन को लेकर लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस चलती रही।आंदोलन के दौरान कई संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी छात्रों का समर्थन किया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। यही कारण है कि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।