भूटान ने क्यों ठुकराया भारत का पेट्रोल 80% ऑफर सामने आई बड़ी वजह
भूटान ने भारत के ई-२० पेट्रोल प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सरकार ने भंडारण क्षमता की कमी, कठिन पर्वतीय भूगोल और परिवहन संबंधी चुनौतियों को इसकी प्रमुख वजह बताया है। फिलहाल देश में पारंपरिक पेट्रोल की आपूर्ति जारी रहेगी।
दि राइजिंग न्यूज़ | थिम्फू | 4 जुलाई 2026
भारत में एथेनॉल मिश्रित ई-२० पेट्रोल को बढ़ावा देने की नीति के बीच पड़ोसी देश भूटान ने फिलहाल इसे अपनाने से इनकार कर दिया है। भूटान का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में उसकी भंडारण क्षमता, परिवहन व्यवस्था और पर्वतीय भूगोल ई-२० पेट्रोल के सुरक्षित उपयोग के लिए अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में फिलहाल पारंपरिक पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
भूटान ने क्यों ठुकराया 80% पेट्रोल पेट्रोल का प्रस्ताव
भारत सरकार एथेनॉल मिश्रित ई-२० पेट्रोल को बढ़ावा देकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में भारतीय तेल कंपनियों ने भूटान को भी ई-२० पेट्रोल की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया था। हालांकि भूटान ने मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।भूटान सरकार का मानना है कि देश की वर्तमान ईंधन संरचना अभी इस प्रकार के मिश्रित ईंधन के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है। इसलिए बिना पर्याप्त तैयारी के नई व्यवस्था लागू करना भविष्य में तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।
भंडारण व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनी
भूटान ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रकार की भंडारण व्यवस्था आवश्यक होती है। यदि लंबे समय तक उचित परिस्थितियों में इसका संरक्षण नहीं किया जाए तो ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।देश में मौजूद अधिकांश ईंधन भंडारण केंद्र पारंपरिक पेट्रोल के अनुरूप विकसित किए गए हैं। ऐसे में ई-२० पेट्रोल के लिए अतिरिक्त निवेश, नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता होगी, जिसे तत्काल लागू करना संभव नहीं माना गया।
पर्वतीय भूगोल ने बढ़ाई मुश्किलें
भूटान का अधिकांश हिस्सा ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों से घिरा हुआ है। यहां ईंधन की आपूर्ति पहले से ही चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। लंबी दूरी, कठिन सड़कें और मौसम की अनिश्चितता परिवहन व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन की गुणवत्ता बनाए रखना अपेक्षाकृत अधिक कठिन हो सकता है। इसी कारण भूटान ने फिलहाल पारंपरिक ईंधन व्यवस्था को जारी रखने का निर्णय लिया है।
भारत की एथेनॉल नीति पर नहीं उठाया सवाल
भूटान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका निर्णय भारत की एथेनॉल मिश्रण नीति के विरोध में नहीं है। भारत अपने घरेलू स्तर पर इस योजना को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।भूटान का कहना है कि प्रत्येक देश की भौगोलिक परिस्थितियां, ईंधन अवसंरचना और आवश्यकताएं अलग होती हैं। इसलिए उसने केवल अपनी तकनीकी और व्यावहारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
फिलहाल जारी रहेगी पारंपरिक पेट्रोल की आपूर्ति
भूटान ने भारतीय तेल कंपनियों से फिलहाल पारंपरिक पेट्रोल की आपूर्ति जारी रखने का अनुरोध किया है। इससे देश में ईंधन आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी और वर्तमान व्यवस्था पहले की तरह संचालित होती रहेगी।सरकार का कहना है कि भविष्य में यदि आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित हो जाता है और तकनीकी तैयारी पूरी हो जाती है, तब एथेनॉल मिश्रित ईंधन को अपनाने की संभावनाओं पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
भारत के लिए क्या है इसका महत्व
भारत पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाना है।हालांकि भूटान का निर्णय यह संकेत देता है कि किसी भी नई ऊर्जा नीति को दूसरे देशों में लागू करने से पहले वहां की स्थानीय परिस्थितियों, तकनीकी क्षमता और आधारभूत संरचना का व्यापक मूल्यांकन आवश्यक होता है।