20 की उम्र से ही कराएं कोलेस्ट्रॉल की जांच, हार्ट अटैक से बचाव के लिए नए नियम लागू

20 की उम्र से ही कराएं कोलेस्ट्रॉल की जांच, हार्ट अटैक से बचाव के लिए नए नियम लागू

20 की उम्र से ही कराएं कोलेस्ट्रॉल की जांच, हार्ट अटैक से बचाव के लिए नए नियम लागू

दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अब कोलेस्ट्रॉल जांच को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नई गाइडलाइन्स के मुताबिक अब लोगों को 30 या 40 की उम्र तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है, बल्कि 20 साल की उम्र से ही नियमित रूप से कोलेस्ट्रॉल की जांच शुरू कर देनी चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक या दिल की बीमारी अचानक नहीं होती, बल्कि यह लंबे समय तक शरीर में धीरे-धीरे विकसित होती है। ऐसे में अगर कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल लेवल का पता चल जाए, तो समय रहते जरूरी कदम उठाकर गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

नई सिफारिशों के अनुसार, 20 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कम से कम एक बार लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराना चाहिए। इसके बाद हर 4 से 5 साल में यह जांच दोहरानी चाहिए। वहीं जिन लोगों के परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास है या जो हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ज्यादा बार जांच करानी चाहिए।

डॉक्टरों के मुताबिक खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) शरीर में बिना किसी लक्षण के बढ़ता रहता है और धीरे-धीरे धमनियों में जमा होकर ब्लड फ्लो को प्रभावित करता है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकती है। इसलिए इसे “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है।

नई गाइडलाइन्स में अब सिर्फ सामान्य कोलेस्ट्रॉल टेस्ट पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि कुछ एडवांस टेस्ट भी शामिल किए गए हैं। इनमें Lipoprotein(a) और ApoB जैसे टेस्ट शामिल हैं, जो दिल की बीमारी के जोखिम का ज्यादा सटीक आकलन करने में मदद करते हैं। इसके अलावा अब लंबे समय के हार्ट रिस्क का आकलन भी किया जा रहा है, जिससे व्यक्ति के भविष्य के स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

भारतीय संदर्भ में यह बदलाव और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां लोगों में कम उम्र में ही हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

डॉक्टरों की सलाह है कि सिर्फ जांच कराना ही काफी नहीं है, बल्कि लाइफस्टाइल में भी सुधार जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और वजन को नियंत्रित रखना दिल को स्वस्थ रखने के लिए बेहद जरूरी है।

नई गाइडलाइन्स का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोग बीमार होने का इंतजार न करें, बल्कि पहले से ही सतर्क रहकर अपनी सेहत का ध्यान रखें। अगर समय रहते कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर लिया जाए, तो हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।