सीजेपी आंदोलन पर राहुल गांधी का हमला

जंतर-मंतर पर जारी सीजेपी आंदोलन के बीच राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता कर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सरकार पर निशाना साधा। वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया और घटनास्थल के दृश्य सुरक्षित रखने का आदेश जारी किया। राजधानी में आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं।

सीजेपी आंदोलन पर राहुल गांधी का हमला

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

जंतर-मंतर पर जारी सीजेपी आंदोलन के 25वें दिन राजनीतिक हलचल और तेज हो गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता कर प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आरोप लगाया, जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस से चार सप्ताह में जवाब मांगा और घटनास्थल के दृश्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। दूसरी ओर राजधानी में भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय के घेराव की भी चर्चा तेज रही।

सीजेपी आंदोलन के बीच राहुल गांधी का सरकार पर हमला, दिल्ली उच्च न्यायालय का बड़ा आदेश, राजधानी में बढ़ा राजनीतिक तना

जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन के 25वें दिन देश की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता कर प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। वहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि घटनास्थल के दृश्य, शरीर पर लगे कैमरों के अभिलेख और निगरानी उपकरणों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए।राजधानी में पूरे दिन आंदोलन, न्यायालय की कार्यवाही और राजनीतिक बयानबाजी को लेकर माहौल गर्म बना रहा। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने में जुटे रहे, जबकि प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।

राहुल गांधी ने छात्रों के समर्थन में उठाए सवाल

दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रख रहे थे, फिर भी उनके साथ कठोर व्यवहार किया गया। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे तो उनके खिलाफ बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी।उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए। राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं थी और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को जारी किया नोटिस

प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने से संबंधित जनहित याचिकाओं पर दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर निर्धारित की है। साथ ही पुलिस को निर्देश दिया गया कि घटनास्थल से जुड़े सभी दृश्य, शरीर पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग तथा निगरानी उपकरणों के अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं ताकि जांच के दौरान उनका उपयोग किया जा सके।

छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और बिना पूर्व चेतावनी के बल प्रयोग किया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ की घटनाएं हुईं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।

प्रदर्शन के दौरान घायल हुए कई छात्र

अदालत में यह भी दावा किया गया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में छात्र घायल हुए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अनेक छात्रों को गंभीर चोटें आईं और कई का उपचार विभिन्न अस्पतालों में कराया गया। उन्होंने बल प्रयोग से संबंधित सभी अभिलेख सुरक्षित रखने की मांग भी रखी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अनावश्यक बल प्रयोग की स्थिति उत्पन्न न हो।

भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय के घेराव की चर्चा

राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां उस समय और तेज हो गईं जब सूत्रों के हवाले से भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय के घेराव की संभावना की चर्चा सामने आई। इसे देखते हुए राजधानी के कई संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। अधिकारियों ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने भी जताई नाराजगी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ हुई घटना दुखद है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है।विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

अन्य राज्यों में भी बढ़ी राजनीतिक हलचल

दिल्ली की घटनाओं का असर अन्य राज्यों में भी देखने को मिला। बिहार के पटना और चंडीगढ़ सहित कई स्थानों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और जोरदार नारेबाजी हुई। कुछ स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति भी बनी, जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बने रह सकते हैं। सरकार और विपक्ष दोनों इस मामले पर लगातार आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं