दिल्ली में सिलेंडर धमाके के बाद मलबे के ढेर में तब्दील हुई इमारत, छह लोग गंभीर रूप से घायल
दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में एक बर्तन पॉलिश करने वाले कारखाने में संदिग्ध एलपीजी सिलेंडर फटने से पूरी इमारत ढह गई, जिसमें ६ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मलबे में अभी भी कुछ लोगों के दबे होने की आशंका है और स्थानीय निवासियों की मदद से राहत कार्य जारी है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 3 जून 2026
मुकुंदपुर में संदिग्ध गैस सिलेंडर विस्फोट से मची भयंकर तबाही
देश की राजधानी दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में मंगलवार को एक बेहद दर्दनाक और खौफनाक हादसा सामने आया है, जहां एक संदिग्ध एलपीजी सिलेंडर ब्लास्ट के कारण पूरी की पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। स्थानीय पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस भयानक विस्फोट की गूंज इतनी जोरदार थी कि आसपास का पूरा इलाका दहल उठा और देखते ही देखते बहुमंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस रूह कंपा देने वाले हादसे के वक्त इमारत के भीतर और आसपास मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई और चारों तरफ धूल का गुबार छा गया। स्थानीय प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस असुरक्षित कार्यस्थल पर हुए धमाके ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाली व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
बर्तन पॉलिश के अवैध कारखाने में हुआ धमाका, छह लोग गंभीर रूप से घायल
जिस दोमंजिला इमारत में यह दर्दनाक हादसा हुआ है, उसका इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से बर्तन पॉलिश करने के काम के लिए किया जा रहा था। इस कारखाने में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण संभावित तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलेंडर में अचानक भीषण रिसाव हुआ और वह टाइम बम की तरह फट गया। पुलिस प्रशासन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दिल दहला देने वाले हादसे में अब तक छह लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में से कुछ की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है, जो कि सीधे तौर पर प्रशासनिक अनदेखी का परिणाम है।
स्थानीय निवासियों ने दिखाई जांबाजी, रेस्क्यू टीम की सुस्ती पर उठे गंभीर सवाल
विस्फोट की खबर मिलते ही सरकारी आपदा प्रबंधन और बचाव दल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय नागरिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए खुद ही मलबे को हटाने का काम शुरू कर दिया था। हालांकि बाद में पहुंची रेस्क्यू टीम ने मलबे के भीतर से तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की, लेकिन आपदा प्रबंधन की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर जनता में भारी रोष देखा जा रहा है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि मलबे के नीचे अभी भी कम से कम एक व्यक्ति के फंसे होने की गंभीर आशंका है, जिसे निकालने के लिए राहत कार्य लगातार जारी है। सरकार की ढीली व्यवस्था के कारण ऐसे हादसों के समय कीमती समय बर्बाद होता है, जिससे मलबे में दबे निर्दोष लोगों की जान पर बन आती है।
दिल्ली में लगातार गिरती इमारतें और सोया हुआ नगर निगम प्रशासन
राजधानी दिल्ली में जर्जर और अवैध रूप से चल रहे व्यावसायिक भवनों का गिरना अब एक आम बात हो चुकी है, जिस पर भ्रष्टाचार में डूबा नगर निगम आंखें मूंदे बैठा है। अभी हाल ही में दक्षिण दिल्ली के महरौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सैदुलाजाब इलाके में भी एक पांच मंजिला इमारत पूरी तरह से जमींदोज हो गई थी। वह अवैध इमारत पास की ही एक दूसरी बिल्डिंग पर जा गिरी थी, जिसके नीचे बनी एक कैंटीन में खाना खा रहे कई बेकसूर छात्र मलबे के नीचे जिंदा दफन हो गए थे। उस पिछले दर्दनाक हादसे में भी छह होनहार छात्रों की असमय मौत हो गई थी, लेकिन उस बड़ी त्रासदी से भी दिल्ली के प्रशासनिक आकाओं ने कोई सबक नहीं लिया, जिसका खामियाजा आज मुकुंदपुर के निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ा है।