यूरोप में भीषण गर्मी से हाहाकार

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। फ्रांस सहित कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। गर्मी से राहत पाने के लिए जलाशयों में उतरने वाले लोगों के साथ हुए हादसों में फ्रांस में 40 लोगों की मौत हो चुकी है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर हीटवेव में से एक बताया है।

यूरोप में भीषण गर्मी से हाहाकार

दि राइजिंग न्यूज़ | पेरिस | 25 जून 2026

रिकॉर्ड गर्मी से जूझ रहा यूरोप

जून 2026 यूरोप के लिए अत्यधिक गर्मी और मौसम संबंधी चुनौतियों का महीना बन गया है। फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, इटली और स्विट्जरलैंड सहित कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। कई स्थानों पर जून महीने के पुराने तापमान रिकॉर्ड भी टूट गए हैं। यह हीटवेव सामान्य मौसमी बदलाव नहीं बल्कि तेजी से बदलते जलवायु पैटर्न का संकेत है।

फ्रांस में 40 लोगों की मौत

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के अनुसार 18 जून से अब तक देश में 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। अधिकांश मृतक युवा थे जो भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, नहरों और तालाबों जैसे असुरक्षित जल स्रोतों में तैरने गए थे।सरकार ने लोगों से केवल निगरानी वाले सुरक्षित जल क्षेत्रों में ही तैरने की अपील की है।

44 डिग्री के पार पहुंचा तापमान

फ्रांस की मौसम एजेंसी मेटियो फ्रांस के अनुसार मंगलवार इस वर्ष का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र के एक शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देश के दर्जनों प्रशासनिक क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में सार्वजनिक सेवाओं और दैनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

पर्यटन स्थलों पर भी पड़ा प्रभाव

भीषण गर्मी के कारण पेरिस के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं। एफिल टॉवर और लूव्र संग्रहालय जैसे प्रसिद्ध स्थलों के संचालन समय में बदलाव किया गया है। स्कूलों के समय में भी संशोधन किया गया है ताकि बच्चों को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके।

पूरे महाद्वीप में बढ़ा संकट

फ्रांस के अलावा ब्रिटेन, स्पेन, इटली और स्विट्जरलैंड भी गंभीर गर्मी की चपेट में हैं। कई शहरों में स्वास्थ्य चेतावनियां जारी की गई हैं। परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा है। कुछ स्थानों पर रेलवे ट्रैक गर्मी के कारण प्रभावित हुए हैं, जबकि हवाई सेवाओं के संचालन में भी चुनौतियां सामने आई हैं।

क्या है ओमेगा ब्लॉक

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान हीटवेव का प्रमुख कारण "ओमेगा ब्लॉक" नामक मौसमीय प्रणाली है। इस स्थिति में उच्च दबाव का एक विशाल क्षेत्र लंबे समय तक किसी इलाके के ऊपर स्थिर बना रहता है।इसके कारण ठंडी हवाएं प्रभावित क्षेत्र तक नहीं पहुंच पातीं और बादलों तथा वर्षा की संभावना कम हो जाती है। परिणामस्वरूप तापमान लगातार बढ़ता रहता है और लंबे समय तक गर्मी बनी रहती है।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती

विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) का कहना है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। यहां तापमान वृद्धि की दर वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी बताई जा रही है।आर्कटिक क्षेत्र और आल्प्स पर्वतों में बर्फ के तेजी से पिघलने तथा समुद्री तापमान में वृद्धि के कारण गर्मी की ऐसी घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में सामने आ रही हैं।

ग्रीनहाउस गैसों को माना जा रहा कारण

जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन ने चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों को बढ़ा दिया है। पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में हीटवेव, सूखा और जंगलों में आग जैसी घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

लोगों को जारी की गई सलाह

यूरोप के विभिन्न देशों की सरकारों ने नागरिकों को दोपहर के समय घरों में रहने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और बुजुर्गों तथा बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभागों ने हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सप्ताहांत तक जारी रह सकती है गर्मी

मौसम विभागों के अनुसार वर्तमान हीटवेव सप्ताहांत तक बनी रह सकती है। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन इससे व्यापक राहत मिलने की उम्मीद कम है।यह संकट केवल एक अस्थायी मौसम घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का स्पष्ट संकेत है। आने वाले वर्षों में ऐसी चरम मौसम घटनाओं से निपटने के लिए सरकारों को दीर्घकालिक पर्यावरणीय और जलवायु नीतियों पर अधिक ध्यान देना होगा।