एच-1बी वीजा के लिए मची होड़, दो लाख से ज्यादा लोगों ने चुकाई भारी शुल्क राशि; अमेरिका का बड़ा खुलासा
अमेरिका में एच-1बी वीजा की मांग लगातार बढ़ रही है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में दो लाख से अधिक लोगों ने अपने आवेदन का तेजी से निपटारा कराने के लिए प्राथमिकता सेवा का विकल्प चुना। विभाग का कहना है कि इस प्रक्रिया से आवेदनों का निस्तारण सामान्य प्रक्रिया की तुलना में काफी कम समय में किया जाता है।
दि राइजिंग न्यूज़ | वाशिंगटन | 3 जून 2026
अमेरिका में रोजगार की तलाश कर रहे विदेशी पेशेवरों के बीच एच-1बी वीजा की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी ताजा जानकारी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने बताया है कि चालू वित्त वर्ष में बड़ी संख्या में आवेदकों ने अपने वीजा आवेदन का जल्द निपटारा कराने के लिए भारी शुल्क राशि का भुगतान किया है। यह आंकड़ा अमेरिका में काम करने की बढ़ती चाहत और वीजा प्रक्रिया में तेजी की मांग को दर्शाता है।गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार, इस वर्ष प्राप्त कुल आवेदनों में से दो लाख से अधिक लोगों ने प्राथमिकता के आधार पर अपने आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने का विकल्प चुना है। इसके लिए आवेदकों ने निर्धारित विशेष शुल्क का भुगतान किया है। प्रशासन का कहना है कि इससे आवेदनों के निस्तारण की गति बढ़ती है और योग्य पेशेवरों को अपेक्षाकृत कम समय में निर्णय मिल पाता है।
इस वर्ष मिले लाखों आवेदन
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के मंत्री मार्कवायने मुलिन ने सीनेट की विनियोग उपसमिति की बैठक में बताया कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान विभाग को लगभग दो लाख छियासी हजार एच-1बी वीजा आवेदन प्राप्त हुए हैं। यह संख्या दर्शाती है कि दुनिया भर के कुशल पेशेवर अब भी अमेरिका को रोजगार और करियर के लिए सबसे महत्वपूर्ण गंतव्य मान रहे हैं।उन्होंने बताया कि कुल आवेदनों में से दो लाख से अधिक लोगों ने अतिरिक्त शुल्क देकर अपने आवेदन को प्राथमिकता श्रेणी में शामिल कराया। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों को तेज सेवा उपलब्ध कराना है जिन्हें कम समय में निर्णय की आवश्यकता होती है। इससे विभाग पर बढ़ते दबाव को भी व्यवस्थित करने में मदद मिलती है।
प्राथमिकता सेवा के लिए बढ़ी मांग
गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदकों ने यह महसूस किया कि सामान्य प्रक्रिया की तुलना में प्राथमिकता सेवा अधिक लाभदायक है। यही कारण है कि इस बार रिकॉर्ड संख्या में लोगों ने अतिरिक्त शुल्क देकर अपने आवेदन को तेजी से निपटाने का विकल्प चुना। वैश्विक प्रतिस्पर्धा, रोजगार के अवसरों और अनिश्चित वीजा प्रक्रिया के कारण लोग अब शीघ्र निर्णय को अधिक महत्व देने लगे हैं। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए तेजी से वीजा स्वीकृति चाहती हैं, जिससे कार्य संबंधी योजनाएं प्रभावित न हों।
सामान्य और प्राथमिकता प्रक्रिया में बड़ा अंतर
मुलिन ने बताया कि प्राथमिकता श्रेणी के अंतर्गत आने वाले आवेदनों का निपटारा लगभग पंद्रह दिनों के भीतर किया जाता है। इसके विपरीत सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन का निपटारा होने में औसतन साढ़े सात महीने तक का समय लग सकता है।यही वजह है कि बड़ी संख्या में आवेदक अतिरिक्त राशि खर्च करने के बावजूद प्राथमिकता सेवा को चुन रहे हैं। समय की बचत और अनिश्चितता में कमी इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता मानी जा रही है। इससे आवेदकों और नियोक्ताओं दोनों को लाभ मिलता है।
चिकित्सकों की कमी का मुद्दा भी उठा
सीनेट की बैठक के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। सीनेटर सुसैन कॉलिंस ने बताया कि मेन राज्य के एक अस्पताल को विदेश से विशेषज्ञ शल्य चिकित्सक बुलाने के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना पड़ा।उन्होंने चिंता जताई कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में योग्य चिकित्सकों की भारी कमी है और ऐसे मामलों में अतिरिक्त आर्थिक बोझ स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना था कि आवश्यक चिकित्सा सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
चिकित्सा क्षेत्र को राहत मिलने के संकेत
सीनेटर कॉलिंस ने सुझाव दिया कि जिन क्षेत्रों में चिकित्सकों की गंभीर कमी है, वहां स्वास्थ्य विशेषज्ञों को इस अतिरिक्त शुल्क से छूट दी जा सकती है। उनका तर्क था कि इससे दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधाएं बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।इस पर गृह सुरक्षा विभाग के मंत्री ने कहा कि विभाग इस प्रस्ताव पर विचार करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे मामलों के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशे जाएंगे और जरूरत पड़ने पर विशेष परिस्थितियों में राहत देने की संभावना भी देखी जाएगी।
ट्रंप प्रशासन की नीति पर बढ़ी चर्चा
इस खुलासे के बाद अमेरिका की आव्रजन नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। आलोचकों का कहना है कि तेज सेवा के लिए भारी शुल्क व्यवस्था आर्थिक रूप से कमजोर आवेदकों के लिए चुनौती बन सकती है, जबकि समर्थकों का मानना है कि इससे प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एच-1बी वीजा को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीतियां आगामी समय में भी बहस का विषय बनी रह सकती हैं। विशेष रूप से कुशल पेशेवरों, प्रौद्योगिकी क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार के फैसलों पर दुनिया भर की नजर बनी रहेगी।