भारत में सेल्फ ड्राइविंग कारों का रास्ता साफ

भारत सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और कनेक्टेड कार तकनीक के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इस फैसले से एडीएएस, स्मार्ट वाहनों और भविष्य की सेल्फ ड्राइविंग कारों के विकास को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है।

भारत में सेल्फ ड्राइविंग कारों का रास्ता साफ

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 16 जून 2026

भारत में सेल्फ ड्राइविंग कारों का रास्ता हुआ आसान

भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने ऑटोमोटिव रडार और कनेक्टेड कार तकनीक से जुड़े लाइसेंस नियमों में बड़ी राहत दी है। सरकार ने 77 गीगाहर्ट्ज से 81 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करने वाले ऑटोमोटिव रडार सिस्टम तथा 5.9 गीगाहर्ट्ज बैंड पर आधारित वाहन संचार प्रणालियों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।  यह फैसला भारत को स्मार्ट मोबिलिटी, उन्नत सुरक्षा तकनीकों और भविष्य की सेल्फ ड्राइविंग कारों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

क्या है सरकार का नया फैसला

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने उन तकनीकों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है जो आधुनिक वाहनों में रडार आधारित सुरक्षा और संचार प्रणाली के रूप में उपयोग होती हैं। 77 से 81 गीगाहर्ट्ज बैंड का उपयोग मुख्य रूप से वाहन के आसपास मौजूद वस्तुओं, वाहनों और संभावित खतरों का पता लगाने के लिए किया जाता है। वहीं 5.9 गीगाहर्ट्ज बैंड वाहन और सड़क किनारे लगे स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच संचार स्थापित करने में मदद करता है। इस कदम से भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां ऐसी तकनीकों के उपयोग के लिए अपेक्षाकृत सरल नियम मौजूद हैं।

कंपनियों के लिए आसान होगा तकनीक लाना

अब तक नई तकनीकों को भारतीय बाजार में लाने के लिए वाहन निर्माताओं को कई प्रकार की मंजूरियों और लाइसेंस प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। इससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते थे। नए नियम लागू होने के बाद वाहन निर्माता कंपनियां वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल हो रहे हार्डवेयर और तकनीकों को भारत में अधिक आसानी से उपलब्ध करा सकेंगी। इससे कंपनियों को भारतीय बाजार के लिए अलग तकनीकी संस्करण तैयार करने की आवश्यकता कम होगी।  इससे उत्पादन लागत कम होगी और नई तकनीकों का प्रसार तेजी से हो सकेगा।

एडीएएस तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

एडीएएस यानी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम आधुनिक वाहनों की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा तकनीकों में से एक है। इस तकनीक के अंतर्गत ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग, अडैप्टिव क्रूज कंट्रोल, लेन कीपिंग असिस्ट और ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग जैसे फीचर शामिल होते हैं। ये सभी सिस्टम रडार और सेंसर आधारित तकनीक पर निर्भर करते हैं। पहले यह सुविधा केवल महंगी लग्जरी कारों में उपलब्ध थी, लेकिन अब धीरे-धीरे मध्यम श्रेणी के वाहनों तक भी पहुंच रही है। लाइसेंस संबंधी बाधाएं समाप्त होने से एडीएएस तकनीक का विस्तार और अधिक तेजी से हो सकता है।

सड़क सुरक्षा में आ सकता है बड़ा बदलाव

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या काफी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देश में लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.77 लाख से अधिक लोगों की जान चली गई।  आधुनिक सुरक्षा तकनीकें दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। एडीएएस सिस्टम ड्राइवर को समय रहते खतरे की जानकारी देकर दुर्घटनाओं की संभावना को कम करते हैं। ऐसी तकनीकों का व्यापक उपयोग सड़क सुरक्षा को नई दिशा दे सकता है।

सेल्फ ड्राइविंग कारों की मजबूत नींव

दुनिया के कई देशों में स्वचालित यानी सेल्फ ड्राइविंग वाहनों पर तेजी से काम हो रहा है। हालांकि भारत अभी पूरी तरह स्वचालित वाहनों के चरण से काफी दूर है, लेकिन रडार सेंसर और वाहन संचार प्रणाली भविष्य की इस तकनीक की बुनियाद मानी जाती है।  आज उठाया गया यह कदम आने वाले वर्षों में भारत में स्वचालित वाहनों के विकास को गति देने में मदद कर सकता है।

क्या है वीटूएक्स तकनीक

5.9 गीगाहर्ट्ज बैंड वीटूएक्स यानी व्हीकल टू एवरीथिंग तकनीक को सपोर्ट करता है। इस तकनीक के जरिए वाहन एक दूसरे से और सड़क पर मौजूद स्मार्ट सिस्टम से जानकारी साझा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि आगे चल रही गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए, सड़क पर कोई बाधा हो या एम्बुलेंस तेजी से आ रही हो, तो यह जानकारी आसपास के वाहनों तक पहले ही पहुंच सकती है। इससे ड्राइवर को प्रतिक्रिया देने के लिए अतिरिक्त समय मिलता है और दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है।

भारतीय कंपनियों को भी होगा फायदा

इस फैसले का लाभ केवल विदेशी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी भारतीय वाहन निर्माता कंपनियां भी उन्नत सुरक्षा तकनीकों को तेजी से अपने वाहनों में शामिल कर सकेंगी। वर्तमान में कई भारतीय कंपनियां अपने प्रीमियम मॉडलों में एडीएएस सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। भविष्य में लागत कम होने पर यह तकनीक किफायती वाहनों तक भी पहुंच सकती है। इसके अलावा बॉश, कॉन्टिनेंटल और क्वालकॉम जैसी तकनीकी कंपनियों को भी नए अवसर मिलने की संभावना है।

अभी शुरुआत है

हालांकि सरकार ने लाइसेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी है, लेकिन इन तकनीकों को सभी वाहनों में अनिवार्य नहीं बनाया गया है। इसका मतलब है कि हर नई कार में तुरंत ये सुविधाएं दिखाई देंगी, ऐसा जरूरी नहीं है। फिर भी यह फैसला उद्योग को स्पष्ट दिशा देने वाला माना जा रहा है।  जैसे-जैसे लागत घटेगी और तकनीक आम लोगों तक पहुंचेगी, वैसे-वैसे भारतीय सड़कों पर स्मार्ट, सुरक्षित और भविष्य की सेल्फ ड्राइविंग तकनीक से लैस वाहन दिखाई देने लगेंगे।

भारत की ऑटोमोबाइल क्रांति का नया अध्याय

ऑटोमोटिव रडार और कनेक्टेड वाहन तकनीकों के लिए लाइसेंस बाध्यता हटाने का निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि भारत की भविष्य की मोबिलिटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यह कदम न केवल वाहन सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि देश को स्मार्ट परिवहन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वाहन प्रणालियों और भविष्य की स्वचालित ड्राइविंग तकनीकों के लिए भी तैयार करेगा।