इसरो ने रचा इतिहास: 6,100 किलोग्राम का सबसे भारी अमेरिकी सैटेलाइट LVM3-M6 से लॉन्च, अब दुनिया भर में बिना टावर मिलेगी वीडियो कॉल सुविधा!

इसरो ने LVM3-M6 रॉकेट से 6,100 किलोग्राम वजनी अमेरिकी सैटेलाइट 'ब्लूबर्ड ब्लॉक-2' सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह भारत से भेजा गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है, जो कहीं से भी 4G/5G कनेक्टिविटी देगा। जानें इस ऐतिहासिक मिशन की पूरी कहानी।

इसरो ने रचा इतिहास: 6,100 किलोग्राम का सबसे भारी अमेरिकी सैटेलाइट LVM3-M6 से लॉन्च, अब दुनिया भर में बिना टावर मिलेगी वीडियो कॉल सुविधा!

श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है! आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से बुधवार सुबह LVM3-M6 रॉकेट ने अमेरिकी सैटेलाइट 'ब्लूबर्ड ब्लॉक-2' को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। यह 6,100 किलोग्राम वजनी उपग्रह भारत से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी सैटेलाइट है, जो भारत की बढ़ती हुई अंतरिक्ष क्षमता का एक और प्रमाण है।

कनेक्टिविटी का नया युग: बिना टावर मिलेगी 4G/5G सुविधा

'ब्लूबर्ड ब्लॉक-2' कोई साधारण उपग्रह नहीं है। यह अगली पीढ़ी का एक अत्याधुनिक संचार सैटेलाइट है, जिसका मुख्य उद्देश्य सामान्य स्मार्टफोन तक सीधे हाई-स्पीड सेल्युलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है। इसका मतलब है कि जल्द ही धरती पर कहीं से भी, चाहे वह दूरदराज का ग्रामीण इलाका हो या घना जंगल, बिना किसी टावर के 4G और 5G वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और हाई-स्पीड डेटा सेवाएं उपलब्ध होंगी।

यह मिशन ISRO की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिका की AST स्पेसमोबाइल (AST एंड साइंस, LLC) के बीच हुए एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक समझौते का हिस्सा है।

लॉन्च की अहमियत और तकनीकी विवरण

इसरो चेयरमैन वी. नारायणन ने इस उपलब्धि को देश के लिए 'बड़ी उपलब्धि' बताया। LVM3-M6 रॉकेट का वजन 640 टन है, जो भारत का सबसे भारी लॉन्च व्हीकल है। इससे पहले, नवंबर में लॉन्च किया गया LVM3-M5 कम्युनिकेशन सैटेलाइट-03 लगभग 4,400 किलोग्राम का था।

बुधवार सुबह 8:55:30 बजे श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरने के लगभग 15 मिनट बाद, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर सफलतापूर्वक 520 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष के लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित हो गया। लॉन्च में 90 सेकंड की देरी हुई थी ताकि श्रीहरिकोटा के ऊपर से गुजर रहे अन्य सक्रिय उपग्रहों से टकराव की आशंका को टाला जा सके।

'बाहुबली रॉकेट' की नौवीं सफल उड़ान

LVM3-M6, जिसे GSLV Mk-III के नाम से भी जाना जाता है, ISRO का एक शक्तिशाली तीन-चरणीय रॉकेट है। इसमें क्रायोजेनिक इंजन और दो S200 सॉलिड रॉकेट बूस्टर लगे हैं। यह LVM3 की नौवीं उड़ान और ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट के लिए तीसरा वाणिज्यिक मिशन है।

LVM3 रॉकेट ने अब तक आठ लगातार सफल लॉन्च पूरे किए हैं, जिनमें ऐतिहासिक चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 मिशन भी शामिल हैं। 2023 में इसी रॉकेट ने चंद्रयान-3 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतारकर भारत को अंतरिक्ष इतिहास में एक खास जगह दिलाई थी। इसके भारी-भरकम आकार के कारण इसे लोकप्रिय रूप से 'बाहुबली रॉकेट' भी कहा जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर इसरो को बधाई देते हुए X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है और भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर है। यह भारत की भारी-भरकम लॉन्च क्षमता को मजबूत करता है और ग्लोबल कॉमर्शियल लॉन्च मार्केट में हमारी बढ़ती भूमिका को मजबूत करता है।"

AST स्पेसमोबाइल का वैश्विक लक्ष्य

अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल दुनिया भर में 50 से अधिक मोबाइल ऑपरेटरों के साथ साझेदारी कर रही है। उनका लक्ष्य सेलुलर ब्रॉडबैंड को हर उस जगह पहुंचाना है जहाँ पारंपरिक नेटवर्क नहीं पहुंच पाता। कंपनी का दावा है कि उनकी सेवा का उपयोग करने के लिए यूजर्स को अपना सर्विस प्रोवाइडर (जैसे एयरटेल, वोडाफोन) बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। यह नई कनेक्टिविटी शिक्षा, सामाजिक नेटवर्किंग, स्वास्थ्य सेवा और कई अन्य क्षेत्रों में अनंत अवसर खोलेगी।

यह मिशन भारत की अंतरिक्ष शक्ति और वैश्विक संचार नेटवर्क को आकार देने में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।