लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतें

लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत और 9 लोग घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में भवन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, फायर एनओसी की कमी, इमरजेंसी एग्जिट का अभाव और रिहायशी नक्शे पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने जैसे गंभीर तथ्य सामने आए हैं।

लखनऊ अग्निकांड में 15 मौतें

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 23 जून 2026

लखनऊ में भीषण अग्निकांड से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में सोमवार दोपहर लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 9 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों की उम्र लगभग 20 से 24 वर्ष के बीच बताई गई है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए।प्रारंभिक जांच में इमारत में सुरक्षा मानकों की अनदेखी, फायर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों के संचालन के आरोप सामने आए हैं। पुलिस ने भवन स्वामियों और संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

इमारत में क्या क्या संचालित हो रहा था

जानकारी के अनुसार जिस इमारत में आग लगी उसके बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर पेट शॉप और क्लिनिक संचालित किए जा रहे थे। वहीं दूसरी मंजिल पर ‘लर्निंग स्पेस’ नाम का कोचिंग सेंटर और ‘हेड हॉपर स्टूडियो’ नामक संस्थान संचालित था।हेड हॉपर स्टूडियो में थ्री डी आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का कार्य किया जाता था। घटना के समय वहां कई छात्र और पेशेवर थ्री डी आर्टिस्ट मौजूद थे।

कैसे फैली आग और कैसे फंसे लोग

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं से भर गई। धुआं तेजी से ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया जिससे लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।आग और धुएं के बीच फंसे कई छात्रों और कर्मचारियों ने अपनी जान बचाने के लिए बाथरूम में खुद को बंद कर लिया और मदद का इंतजार करने लगे। लेकिन धुएं की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई लोग बाहर नहीं निकल सके।

घंटों चला राहत और बचाव अभियान

घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग और पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंच गईं। स्थानीय लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में सक्रिय सहयोग किया।दमकलकर्मियों को आग पर काबू पाने में कई घंटे लग गए। लगातार प्रयासों के बाद आग को नियंत्रित किया गया और इमारत के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच जारी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान

घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव गृह को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि हादसे की तह तक जाकर दोषियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाएगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने जताया शोक

प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी इस भीषण हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है।प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। वहीं घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

जांच के लिए एसआईटी का गठन

राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है।एसआईटी में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात तथा लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को सदस्य बनाया गया है।सरकार ने एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह निर्णय हादसे को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लिया गया।

बिल्डिंग मालिक समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ अग्निकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।गिरफ्तार आरोपियों में बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला, एनिमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो के संचालक तुषांत जायसवाल तथा स्टूडियो मैनेजर रामकृष्ण उपाध्याय शामिल हैं।पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा मामले में लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया है।

रिहायशी नक्शे पर बना कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

जांच में सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी उसका नक्शा आवासीय भवन के रूप में स्वीकृत कराया गया था।बाद में उसी भवन में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाने लगीं। आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की जानकारी के बावजूद रिहायशी भवन को व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में बदल दिया गया लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

इमरजेंसी एग्जिट का नहीं था कोई इंतजाम

हादसे में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट मौजूद नहीं था।भवन के पीछे की ओर भी कोई वैकल्पिक निकास मार्ग नहीं था। आग लगने के बाद लोग पीछे की तरफ भागे लेकिन वहां बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। घने धुएं और दम घुटने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।

फायर एनओसी को लेकर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश फायर सेफ्टी नियमों के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। इसके अलावा व्यावसायिक गतिविधियों वाले भवनों को भी फायर विभाग की मंजूरी लेना आवश्यक होता है।विशेष रूप से कोचिंग सेंटर और गेमिंग जोन जैसी गतिविधियों के लिए फायर एग्जिट, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट और स्मोक डिटेक्टर की जांच के बाद ही अनुमति दी जाती है।अब तक सामने आए तथ्यों से संकेत मिल रहे हैं कि भवन ने आवश्यक फायर एनओसी प्राप्त नहीं की थी। साथ ही बिजली कनेक्शन के ओवरलोड होने की भी आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार शॉर्ट सर्किट की घटनाओं के पीछे अक्सर ओवरलोडिंग एक प्रमुख कारण होती है।

जलती तार पकड़कर बचाई जान

इस भीषण हादसे के चश्मदीद और थ्री डी आर्टिस्ट मोहम्मद आसिफ ने अपनी भयावह आपबीती सुनाई है।उन्होंने बताया कि आग के दौरान इमारत के अंदर हालात इतने खराब हो गए थे कि बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था। वह अपने साथियों के साथ दूसरी मंजिल पर मौजूद थे तभी आग तेजी से फैलने लगी।आसिफ ने बताया कि चारों तरफ धुआं और लपटें थीं। ऐसे में जान बचाने के लिए उन्हें और उनके साथियों को जोखिम उठाना पड़ा।

जले हुए हाथ दिखाकर सुनाई दर्दनाक कहानी

बातचीत में मोहम्मद आसिफ ने अपने झुलसे हुए हाथ दिखाते हुए कहा कि उनके हाथ आग में जल गए।उन्होंने बताया कि नीचे उतरने के लिए उन्हें जलती हुई बिजली की तार का सहारा लेना पड़ा। चारों ओर आग लगी हुई थी और लोग अपनी जान बचाने के लिए किसी भी तरह बाहर निकलने का प्रयास कर रहे थे।

सीनियर ने दी थी आग लगने की जानकारी

आसिफ के अनुसार उन्हें आग लगने की सूचना उनके सीनियर ने दी थी।सीनियर ने आकर सभी कर्मचारियों से कहा कि नीचे आग लग गई है इसलिए सिस्टम बंद कर बाहर निकलने की तैयारी करें। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि आग इतनी तेजी से फैल चुकी है।लेकिन जब लोग बाहर निकलने लगे तब तक पूरा ऑफिस धुएं से भर चुका था और आग निचली मंजिलों से ऊपर तक पहुंच गई थी।

25 से 30 लोग मौजूद थे इमारत में

मोहम्मद आसिफ ने बताया कि घटना के समय इमारत में लगभग 25 से 30 लोग मौजूद थे।इनमें सभी पेशेवर थ्री डी आर्टिस्ट थे जो गेमिंग स्टूडियो में कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार यह एक गेमिंग स्टूडियो था जहां गेमिंग से संबंधित प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाता था।

पेट शॉप के गोदाम में शॉर्ट सर्किट की आशंका

आसिफ का दावा है कि आग नीचे स्थित पेट शॉप के गोदाम में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी।उन्होंने बताया कि गोदाम में बड़ी मात्रा में डॉग फूड रखा हुआ था। आग लगने के बाद वह तेजी से फैल गई और कुछ ही समय में पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया।हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

खिड़कियों और बिजली के तारों से बची कुछ जिंदगियां

आग फैलने के बाद कई लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों का सहारा लिया।कुछ लोग बाथरूम में छिप गए जबकि कई लोगों ने बिजली के तारों को पकड़कर नीचे उतरने की कोशिश की। इसी दौरान कई लोगों के हाथ और उंगलियां गंभीर रूप से झुलस गईं।

इमरजेंसी एग्जिट नहीं होने से बढ़ा नुकसान

आसिफ ने बताया कि इमारत में कोई इमरजेंसी एग्जिट नहीं था।उनके अनुसार इसी वजह से लोग अंदर फंस गए और बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि लगभग 10 से 11 लोग ही सुरक्षित बाहर निकल पाए जबकि बाकी लोग धुएं और आग के बीच फंस गए।उन्होंने इस हादसे को बेहद भयावह बताते हुए कहा कि वहां मौजूद हर व्यक्ति ने अपनी जान बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन हालात इतने खराब थे कि बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था।