कांग्रेस के रवैये पर विजयन का बड़ा हमला

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विजयन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी का रवैया विपक्षी गठबंधन को मजबूत करने के बजाय भाजपा को लाभ पहुंचा रहा है।

कांग्रेस के रवैये पर विजयन का बड़ा हमला

दि राइजिंग न्यूज़ | तिरुवनंतपुरम | 15 जून 2026

राहुल गांधी के बयान पर विजयन का पलटवार

विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के भीतर चल रहे मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता पिनाराई विजयन ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। विजयन ने न सिर्फ राहुल गांधी की टिप्पणी पर सवाल उठाए, बल्कि कांग्रेस की कार्यशैली को भी विपक्षी एकता के लिए नुकसानदायक बताया।

पॉडकास्ट में दिए बयान से शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद राहुल गांधी के एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि केरल में राजनीतिक परिस्थितियां ऐसी हैं कि वह पिनाराई विजयन को गले नहीं लगा सकते। राहुल गांधी के इस बयान को राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा मिली और विपक्षी दलों के बीच रिश्तों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए। राहुल गांधी की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पिनाराई विजयन ने कहा कि उनके और राहुल गांधी के बीच गले मिलने की कोई परंपरा नहीं रही है। उन्होंने कहा कि जब भी दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो वे सामान्य रूप से हाथ मिलाकर या अभिवादन कर एक-दूसरे का स्वागत करते हैं।

मोदी से गले मिलने का किया जिक्र

पिनाराई विजयन ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी एक पुरानी तस्वीर का भी उल्लेख किया। विजयन ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री मोदी के गले मिलते हुए देखा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है, लेकिन राहुल गांधी का हालिया बयान उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को उजागर करता है। विजयन ने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणियां विपक्षी एकता को मजबूत नहीं करतीं बल्कि सहयोगी दलों के बीच दूरी बढ़ाने का काम करती हैं।

कांग्रेस के रवैये को बताया समस्या की जड़

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन के भीतर पैदा हुई कई समस्याओं के पीछे कांग्रेस का रवैया जिम्मेदार है। उनके अनुसार कांग्रेस अक्सर गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों की चिंताओं और सुझावों को गंभीरता से नहीं लेती। विजयन ने कहा कि विपक्षी दलों का गठबंधन केवल एक राजनीतिक मंच नहीं बल्कि भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष का माध्यम है। ऐसे में यदि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी अपने सहयोगियों के साथ सामंजस्य नहीं बनाए रखती तो इसका असर पूरे गठबंधन पर पड़ता है।

अखिलेश और तेजस्वी का भी लिया नाम

पिनाराई विजयन ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन की बैठकों में केवल उनकी पार्टी ने ही नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव सहित कई अन्य दलों ने भी कांग्रेस के रवैये को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि गठबंधन के कई सहयोगी दलों को लगता है कि कांग्रेस अक्सर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को गठबंधन के सामूहिक हितों से ऊपर रखती है। यही वजह है कि कई बार रणनीतिक मुद्दों पर एकमत होने में कठिनाई आती है।

भाजपा को मिल सकता है फायदा

विजयन ने चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्षी दलों के बीच लगातार बढ़ते मतभेदों का सबसे बड़ा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भाजपा लंबे समय से विपक्ष की एकता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और यदि विपक्षी दल आपसी विवादों में उलझे रहेंगे तो भाजपा को राजनीतिक बढ़त मिलना स्वाभाविक है। उनके अनुसार विपक्षी दलों को व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर साझा राजनीतिक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में विपक्ष को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इंडिया गठबंधन की एकता पर फिर उठे सवाल

विजयन और राहुल गांधी के बीच शुरू हुई यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब देश में कई राज्यों के चुनाव और आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। विपक्षी गठबंधन पहले से ही सीट बंटवारे, क्षेत्रीय नेतृत्व और रणनीतिक मुद्दों को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक विवाद गठबंधन की छवि को प्रभावित कर सकते हैं। विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपने आंतरिक मतभेदों को नियंत्रित करते हुए भाजपा के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट विकल्प पेश करें।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा

विजयन के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इंडिया गठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य है या फिर सहयोगी दलों के बीच असंतोष लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में कांग्रेस और अन्य सहयोगी दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल इतना तय है कि पिनाराई विजयन की टिप्पणी ने विपक्षी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और इंडिया गठबंधन की आंतरिक एकता एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है।